भाजपा नेता विजय सांपला ने अजय अटवाल हत्याकांड में एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं जोड़ने की मांग की

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Navbharat Times
चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय सांपला ने अबोहर में अजय अटवाल की हत्या के मामले में एफआईआर के अंदर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस केस में शिव लाल डोडा का नाम भी शामिल किया जाए। अजय अटवाल का परिवार पिछले एक हफ्ते से न्याय की मांग कर रहा है और शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया है। विजय सांपला ने भाजपा विधायक संदीप जाखड़, एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शीतल अनुराग और अन्य नेताओं के साथ धरना स्थल पर जाकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।

सांपला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चेतावनी दी कि उन्हें अजय अटवाल मामले के असली आरोपियों को बचाना बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा, "यदि सरकार न्याय देने में विफल रहती है तो यह आंदोलन पूरे पंजाब में फैल जाएगा।" यह आंदोलन इसलिए चल रहा है क्योंकि अजय अटवाल वर्ष 2015 के भीम टांक हत्याकांड में गवाह थे। इस मामले में शिव लाल डोडा को उम्रकैद की सजा हुई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भीम टांक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया और अब अजय अटवाल के परिवार के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
सांपला ने याद दिलाया कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने पहले भीम टांक के परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा, "परिवार के साथ खड़े होने के बजाय आपने उनकी मदद तक नहीं की, बल्कि दोषी शिव लाल डोडा के साथ राजनीतिक संबंध बना लिए। अब आप उसी व्यक्ति का पक्ष ले रहे हैं।" यह संदेश साफ है कि राजनेताओं को दलित समाज की संवेदनाओं का सम्मान करना चाहिए।

अजय अटवाल के परिवार की लड़ाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि आदिवासी और दलित समुदाय अब अन्याय के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। अगर अजय अटवाल के परिवार को न्याय नहीं मिला, तो यह विरोध प्रदर्शनों का रूप ले सकता है। सांपला ने कहा कि दलित समाज के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अजय की हत्या ने पंजाब में हंगामा मचा दिया है। इस हत्या के पीछे के सच को सामने लाने की मांग तेज हो गई है। ऐसे में अजय अटवाल का परिवार सरकार से सही न्याय की उम्मीद कर रहा है। सांपला ने एक बार फिर दोहराया कि “यदि सरकार टालमटोल करती है, तो हम इसे पूरे पंजाब में फैलाने के लिए मजबूर होंगे।”

इस मुद्दे ने पंजाब में भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

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