मणिपुर मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने गन कल्चर खत्म करने का दिया संदेश, सिनाई कैंप का दौरा

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Navbharat Times
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने रविवार को कहा कि जब तक राज्य में 'गन कल्चर' यानी बंदूक संस्कृति बनी रहेगी, तब तक न तो मणिपुर तरक्की कर सकता है और न ही यहां स्थायी शांति आ सकती है। उन्होंने राज्य के लोगों से हिंसा को छोड़ने, अवैध हथियारों को सौंपने और शांति व सद्भाव स्थापित करने के लिए मिलकर काम करने की गुजारिश की। मुख्यमंत्री ने कांगपोकपी जिले के 'सिनाई कैंप' का दौरा किया, जो उग्रवादियों के लिए निर्धारित एक कैंप है।

इस यात्रा का उद्देश्य राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को समझना था। पिछले सप्ताह, सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया गया था। इस दौरान सिनाई कैंप से हथियारों को हटाया गया। यह कार्रवाई तब हुई, जब कांगपोकपी और इंफाल ईस्ट जिलों में तीन नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। सीआरपीएफ ने कैंप को अपने नियंत्रण में ले लिया और अभियान के दौरान 24 से अधिक हथियार, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की गई।
खेमचंद सिंह ने पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री के तौर पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' के तहत स्थापित कैंप का दौरा किया। उनके साथ सरकारी प्रवक्ता और विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह भी थे। मुख्यमंत्री ने कैंप परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सीआरपीएफ के जवानों की बहादुरी की प्रशंसा की और उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि "यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तलाशी अभियानों में आम नागरिक प्रभावित न हों।"

अभियान के दौरान, सुरक्षा बलों को 17 लोग मिले जो फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। इन लोगों ने खुद को 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' के पंजीकृत सदस्य बताया था। मुख्यमंत्री ने इस बारे में जानकारी देने के लिए वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों और जवानों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि "सुरक्षाकर्मी यहां लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए तैनात हैं।"

मुख्यमंत्री की इस यात्रा का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करना भी था। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों और गांव वालों से बातचीत की। खेमचंद सिंह ने लोगों को विश्वास दिलाया कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है। यह सभी कदम इसलिए उठाए जा रहे हैं ताकि मणिपुर में शांति और स्थिरता कायम हो सके।

अगस्त 2008 से केंद्र सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' समझौते के तहत 23 भूमिगत संगठन सक्रिय हैं। इनमें से आठ संगठन 'यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट' (यूपीएफ) के अंतर्गत हैं, जबकि 15 संगठन 'कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन' (केएनओ) के तहत काम करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में उग्रवाद की समस्या कितनी गंभीर है और इसे खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

सिनाई कैंप, 'कुकी नेशनल आर्मी' (केएनए) और 'कुकी लिबरेशन आर्मी' (केएलए) के लिए बनाया गया था। ये दोनों संगठन 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' के हिस्से हैं। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा अधिकारियों से इस योजना के सफल कार्यान्वयन के बारे में चर्चा की और सभी से मिलकर काम करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह का यह दौरा यह दर्शाता है कि सरकार स्थिति को लेकर गंभीर है। एक स्थाई शांति की स्थापना के लिए उन्होंने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की। मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए यह जरूरी है कि सभी वैध और अवैध हथियारों को ठीक से नियंत्रित किया जाए।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि मणिपुर में शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस आधार जरूरी है। राज्य सरकार और सुरक्षा बल प्रयासरत हैं कि स्थिति को सामान्य किया जाए और हिंसा को समाप्त किया जाए। सभी नागरिकों का सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण है।

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