कांग्रेस ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के तहत महाभियोग कार्यवाही की शुरुआत की

NewsPoint•
Navbharat Times
कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की। पार्टी ने यह कार्रवाई मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास पर एक प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग कार्यवाही' के माध्यम से की। इस कार्यक्रम में लोकसभा की तरह एक विशेष मंच तैयार किया गया। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर छह प्रमुख आरोप पढ़े और कहा कि उनकी मौजूदगी लोकतंत्र के लिए खतरा है। कांग्रेस ने इस मौके पर आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार चुनावों में हेरफेर कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर चुनावों से जुड़ी हेराफेरी के आरोप लगाए। इसमें 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने, फॉर्म-6 में समझौते बगैर बदलाव करने जैसी बातें शामिल थीं। खड़गे ने कहा कि "हम लोकतंत्र की उस बुनियाद को बचाना चाहते हैं, जिस पर भाजपा की ओर से खतरा पैदा किया जा रहा है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाया जाए और चुनावों में सुधार की जरूरत है। उन्होंने यह भी मांग की कि राज्यसभा में चुनाव आयुक्तों को लेकर नए कानून को तुरंत रद्द किया जाए। यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिसे खड़गे ने अनुचित बताया।

इस दौरान, खड़गे ने राहुल गांधी पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाने वालों को भी जवाब दिया। आरोप लगाया गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने हमेशा से वयस्क मताधिकार का विरोध किया है।

इस प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यवाही में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इंडी गठबंधन के सदस्य देश की 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि चुनाव आयोग को उसके कामकाज में सुधार किया जाए।

जब खड़गे ने बहस शुरू करने के लिए प्रस्ताव पेश किया, तब गठबंधन के नेताओं ने मेज थपथपाकर समर्थन दिया और "वोट चोर, गद्दी छोड़" जैसे नारे लगाए। कांग्रेस की इस कार्रवाई ने राजनीति में हलचल मचा दी है और यह स्पष्ट किया है कि वे भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए गंभीर हैं।

कुल मिलाकर, कांग्रेस ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें हटाने की मांग की है। यह सभी आरोप चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

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