पूर्व टीएमसी नेता देबराज पाल को हत्या और जबरन वसूली के मामले में पुलिस ने फिर से गिरफ्तार किया
पूर्व टीएमसी नेता देबराज पाल को हत्या और जबरन वसूली के मामले में पुलिस ने फिर से गिरफ्तार किया
NewsPoint•
कोलकाता, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में मोगरा के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व नेता देबराज पाल उर्फ देबू को हत्या और जबरन वसूली के कई आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि उनकी गिरफ्तारी के समय उनके पास से एक सिंगल शॉट पिस्टल भी मिली है। बता दें, देबू पहले भी एक हत्या के मामले में जेल जा चुके हैं।
मोगरा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत त्रिवेणी कलिताला में रहने वाले देबू कभी बंशबेरिया नगर तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। तृणमूल शासन के दौरान वे कई विवादों में शामिल रहे थे। इस समय उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है जिसमें उन्हें अवैध हथियार रखने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शुक्रवार रात को एसटीकेके रोड से उन्हें गिरफ्तार किया। जांच के लिए उन्हें जीरत श्यामप्रसाद मुखर्जी ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए देबू को चिनसुराह अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि देबू के खिलाफ हत्या और जबरन वसूली के कई मामले पहले से ही दर्ज हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जेल की सजा काटने के बाद देबू ने तृणमूल पार्टी से दूरी बना ली थी। लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से वे फिर से सक्रिय हो गए थे। अब वे तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी अभियानों में प्रचार करते रहे हैं।
इस बार पुलिस ने कार्रवाई की है, जिसमें उनके खिलाफ अवैध हथियार रखने और पहले दर्ज मामलों को भी ध्यान में रखा गया है। दरअसल, राज्य विधानसभा चुनाव के बाद सरकार में बदलाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं, पूर्व मंत्रियों और पार्षदों को पुलिस ने जबरन वसूली और अन्य गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ गुस्साए लोगों ने अंडे फेंके। कई मौकों पर, गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस नेताओं पर अंडे फेंकते हुए लोगों ने "चोर-चोर" के नारे भी लगाए। यह पूरे घटनाक्रम को दर्शाता है कि राजनीति में जब विवाद खड़े होते हैं तो स्थानीय लोग अपनी नाराजगी किस तरह से व्यक्त करते हैं।
इस प्रकार, देबराज पाल की गिरफ्तारी तृणमूल कांग्रेस के लिए एक नई परेशानी लेकर आई है।