कर्नाटक एसआईटी के तीन अधिकारियों को प्रज्वल रेवन्ना यौन उत्पीड़न मामले में उत्कृष्टता के लिए केंद्रीय मेडल मिला

NewsPoint•
Navbharat Times
कर्नाटक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के तीन अधिकारियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय से "मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन" मिला है। यह सम्मान उन्हें पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों की सफल जांच के लिए मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि इंस्पेक्टर शोभा, सहायक उपनिरीक्षक रत्नम्मा और सीएचसी बालकृष्ण को इस सम्मान से नवाजा गया है। इन अधिकारियों ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ मजबूत सबूत पेश करके उन्हें दोषी साबित किया।

प्रज्वल रेवन्ना, जो पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते हैं, को एक गंभीर दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया है। उन्हें बेंगलुरु की विशेष अदालत ने 1 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया और अगले दिन उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में एक 47 वर्षीय घरेलू महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोप थे। आरोप है कि यह घटनाएं उनके परिवार के फार्महाउस और आवास पर हुई थीं।
इस मामले में आश्चर्यजनक बात यह थी कि जांच के दौरान एसआईटी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लीक हुए वीडियो में आरोपी का चेहरा स्पष्ट नहीं था। ऐसे में, एसआईटी ने शरीर पर मौजूद तिल, टैटू और जन्म चिह्न का उपयोग किया। उन्होंने चिकित्सीय परीक्षण की तस्वीरों और फोरेंसिक तकनीकों के माध्यम से आरोपी की पहचान की। एसआईटी ने सैकड़ों वीडियो और हजारों डिजिटल स्क्रीनशॉट का विश्लेषण किया। वे अलग-अलग पीड़ितों के रिकॉर्ड भी तैयार करते रहे और घटनास्थल के विभिन्न स्थानों का गहराई से अध्ययन किया।

अदालत ने रेवन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(के) और 376(2)(एन) के तहत कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा, उन्हें यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने का प्रयास, झांकने (वॉयूरिज्म), आपराधिक धमकी, साक्ष्य नष्ट करने और आईटी कानून के उल्लंघन जैसी अन्य धाराओं में भी सजा दी गई। अदालत ने उन पर 11.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इसमें से लगभग 11.25 लाख रुपए पीड़िता को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया गया।

प्रज्वल रेवन्ना ने अपनी सजा और दोष सिद्धि को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी है। लेकिन दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि "अपराध की गंभीरता और लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए" यह फैसला लिया गया।

इस मामले में जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों को धमकियां मिलीं। इसके चलते अदालत को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश देने पड़े। सजा के दौरान रेवन्ना की उच्च सुरक्षा वाले जेल सेल से मोबाइल फोन और पेन ड्राइव जैसे प्रतिबंधित सामान की बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसआईटी की कामयाब जांच के परिणामस्वरूप इन तीन अधिकारियों को केन्द्र सरकार की ओर से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इनकी तारीफ की है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सिद्ध करता है कि कड़े मामले में भी न्याय के लिए सही जांच का कितना महत्व है।

आखिरकार, यह मामला उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो कानून का उल्लंघन करते हैं। यह साफ है कि न्याय अपने रास्ते पर चलता है और सच्चाई को सामने लाने के लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। इन अधिकारियों की मेहनत के लिए निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं।

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