जयकिशन कपाड़िया की कहानी: कैसे आयुष्मान भारत योजना ने उसे व्हीलचेयर से खड़ा किया

NewsPoint•
Navbharat Times
गांधीनगर, 3 नवंबर। गुजरात के मेहसाणा जिले के 32 वर्षीय जयकिशन कपाड़िया कुछ समय पहले तक व्हीलचेयर पर निर्भर थे। उन्होंने सामान्य जीवन जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना ने उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ लाया। इस योजना ने उन्हें जरूरत के समय में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं, जिससे वह फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में सफल रहे। अब जयकिशन न केवल चल सकते हैं, बल्कि नौकरी पाने का भी सपना देख रहे हैं।

जयकिशन की मुश्किलों की शुरुआत 17 साल की उम्र में किडनी की बीमारियों के साथ हुई। इसके बाद उनकी मां ने अपनी एक किडनी देकर उनकी जान बचाई। 2012 में उनकी किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ, जिसके बाद कुछ समय तक उनकी सेहत ठीक रही। लेकिन लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के सेवन से उनके कूल्हे के दोनों जोड़ खराब हो गए। धीरे-धीरे उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह अपने दैनिक काम भी नहीं कर पा रहे थे और पूरी तरह से व्हीलचेयर पर निर्भर हो चुके थे।
आर्थिक तंगी ने उनके इलाज को चुनौतीपूर्ण बना दिया। एक समय ऐसा भी आया जब उनका वजन घटकर सिर्फ 30-35 किलोग्राम रह गया। तीन साल पहले, उनकी मां ने उन्हें अहमदाबाद के ‘गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट’ में भर्ती कराया। वहां संस्थान के निदेशक डॉ. पीयूष मित्तल और उनकी विशेषज्ञों की टीम ने जयकिशन का इलाज करना शुरू किया।

जयकिशन का इलाज ‘आयुष्मान भारत’ योजना के अंतर्गत हुआ। उनके लिए यह योजना जीवन रक्षक साबित हुई। उनकी चार सर्जरियां हुईं, जिनमें कूल्हे के जोड़ को बदलना भी शामिल था। इसके साथ ही, फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन के जरिए उनकी स्थिति में सुधार लाया गया।

डॉ. पीयूष मित्तल ने बताया, “जब जयकिशन पहली बार हमारे संस्थान में आए, तो उनकी हालत गंभीर थी। वह व्हीलचेयर पर थे और बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे। उनका वजन मात्र 30 किलोग्राम था और उनकी हड्डियां बहुत कमजोर हो चुकी थीं।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने फिजियोथेरेपी और जरूरी दवाओं के साथ उनका उपचार शुरू किया। साथ ही, उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करने पर ध्यान दिया। फिर उनके कूल्हों की सर्जरी एक-एक करके की गई। हमारा लक्ष्य था कि हम उन्हें फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर सकें और स्वतंत्र जीवन जीने लायक बना सकें।”

जयकिशन ने अपनी नई जिंदगी के बारे में बात करते हुए कहा, “मेरी मां मुझे व्हीलचेयर पर अस्पताल लाई थीं। उस समय मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था। यहां के डॉक्टरों ने मेरी सर्जरी की। पहले एक पैर की और फिर दूसरे पैर की। अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं। एक समय ऐसा था जब मुझे नहीं लगा था कि मैं कभी दोबारा चल पाऊंगा, लेकिन अब अपनी हालत में सुधार देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि वे Government की इस जन-कल्याणकारी योजना के लिए बहुत आभारी हैं।”

अब जयकिशन की स्थिति में काफी सुधार आया है। वह अपने दम पर खड़े हो सकते हैं और चल-फिर भी सकते हैं। वह अब सामान्य जिंदगी जीने की राह पर हैं और नौकरी पाने की तैयारी भी कर रहें हैं। उनकी मां के लिए यह एक खुशहाल मुकाम है, जो अपने बेटे को पहले की तरह जीवन जीते देखना चाहती हैं।

इस प्रकार, ‘आयुष्मान भारत’ योजना ने जयकिशन जैसे कई लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया है। यह योजना उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बन गई है, जो आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। जयकिशन की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही इलाज और सहयोग से किसी भी स्थिति से उबरा जा सकता है।

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