भारत और पोलैंड के बीच व्यापार तीन गुना करने की संभावना, एंटनी स्वितल्स्की का बयान
भारत और पोलैंड के बीच व्यापार तीन गुना करने की संभावना, एंटनी स्वितल्स्की का बयान
NewsPoint•
नई दिल्ली, 5 नवंबर। भारत और पोलैंड के बीच विदेशी मुद्रा व्यापार (एफटीए) के साथ-साथ बिजनेस फोरम में सहयोग बढ़ाने से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में तिगुनी वृद्धि की संभावना है। यह जानकारी पोलैंड के राजदूत एंटनी स्वितल्स्की ने एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों ने इस समझौते से मिले अवसरों का पूरा लाभ उठाया, तो व्यापार स्तर न केवल दोगुना बल्कि तिगुना हो सकता है।
स्वितल्स्की ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार का मौजूदा स्तर वास्तव में इनकी अर्थव्यवस्थाओं की पूरी क्षमता को नहीं दर्शाता है। हाल ही में पोलैंड के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान, नई दिल्ली और बेंगलुरु में दो बड़े बिजनेस फोरम का आयोजन किया गया था। इस दौरान 100 से अधिक पोलिश कंपनियों ने भाग लिया, जबकि लगभग 200 भारतीय कंपनियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। इसके परिणामस्वरूप 13 अनुबंधों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और ‘लेटर ऑफ इंटरेस्ट’ (एलओआई) पर हस्ताक्षर हुए।उन्होंने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि दिसंबर की शुरुआत में समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और अगले साल की शुरुआत में यह लागू हो जाएगा।”
पोलैंड में भारतीय निवेश पहले से ही मौजूद है, जबकि भारत में पोलिश निवेश अभी भी अपनी क्षमता तक नहीं पहुंचा है। स्वितल्स्की ने भारतीय कंपनियों को पोलैंड में निवेश के लिए आमंत्रित किया और कहा कि पोलैंड एक गेटवे के रूप में काम कर सकता है।
रक्षा क्षेत्र पर उन्होंने बताया कि दोनों देशों के नेता ने सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की हालिया वारसॉ यात्रा से नए अनुबंध और समझौते होने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र संबंधी उन्होंने कहा कि पोलिश कंपनियां भारतीय साझेदारों के साथ सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में काम करने में रुचि रखती हैं।
स्वितल्स्की ने एफटीए के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि पोलैंड ने इस समझौते पर जल्दी हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने के लिए जोर दिया है।
इस प्रकार, भारत और पोलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में आगे बढ़ने की संभावनाएं खुल रही हैं। व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगी। इससे न केवल व्यापार का स्तर बढ़ेगा, बल्कि निवेश के भी नए रास्ते खुलेंगे।