अनिल कुंबले: भारतीय क्रिकेट के सफलतम स्पिनर, कप्तान बनने का मलाल और उनके रिकॉर्ड

NewsPoint•
Navbharat Times
अनिल कुंबले, भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर, 16 अक्टूबर को 56 साल के हो गए हैं। कुंबले को 2007 में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपी गई थी, जब उनकी उम्र 37 साल थी। कप्तान के तौर पर उन्होंने एक साल बाद 2008 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उन्हें अपनी करियर में कप्तानी देर से मिलने का मलाल था। इस बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में खुलकर बातें की थीं। कुंबले का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में मैच विजनर्स में शामिल है। उन्होंने 14 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की, जिसमें 3 मैचों में जीत मिली, 5 में हार मिली और 6 मैच ड्रॉ रहे।

कुंबले का जन्म 17 अक्टूबर 1970 को बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर में हर तरह की सफलता हासिल की। लेकिन, कप्तानी मिलने का समय उनके लिए एक दुःख की बात रही। 2008 में अपने संन्यास के बाद, उन्होंने कहा था कि सौरव गांगुली उनके सीनियर थे। उन्होंने यह भी कहा, "उस समय मैं थोड़ा निराश था, क्योंकि मैं गांगुली का सीनियर था। लेकिन, ऐसी चीजों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता।" कुंबले ने गांगुली की कप्तानी की भी सराहना की।
कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 619 विकेट लिए हैं, और वनडे में 337 विकेट। उनकी कुल संख्या 953 विकेट है। वे विश्व टेस्ट क्रिकेट में मुरलीधरन, शेन वॉर्न और जेम्स एंडरसन के बाद चौथे सबसे सफल गेंदबाज हैं। कुंबले दाएं हाथ के लेग स्पिनर हैं और भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अद्वितीय है।

कप्तान बनने के बाद, कुंबले ने भारतीय टीम को अच्छे प्रदर्शन की तरफ अग्रसर किया। लेकिन, वे खुद को अपनी अहमियत महसूस करने में कुछ समय लगे। उन्होंने गांगुली की टीम के मुख्य गेंदबाज के रूप में अपनी भूमिका निभाई। कुंबले का सपना 37 साल की उम्र में पूरा हुआ, और वे एक साल तक कप्तान रहे।

कुंबले ने 14 टेस्ट मैच की कप्तानी में तीन जीत हासिल की। हांलाकि टीम को पांच मैचों में हार भी मिली और छह मैच ड्रॉ रहे। उनके द्वारा हासिल की गई उपलब्धियां साबित करती हैं कि कुंबले ने भारतीय गेंदबाजी को एक नई पहचान दी।

कुंबले अब भी क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय हैं। वे कमेंट्री, कोचिंग और कई अन्य क्रिकेट संबंधित कार्यों में व्यस्त रहते हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

कुंबले की क्रिकेट यात्रा प्रेरणा से भरी है। उन्होंने अपने अनुभवों से सीखा और आज भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए उदाहरण बने हुए हैं। उनकी कहानी केवल उनके खेल से नहीं, बल्कि उनके प्रयासों और यथार्थवादी दृष्टिकोण से भी भरी है। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा लोगों को याद रहेगा।

रेकमेंडेड खबरें