योगी आदित्यनाथ ने 'भारत आंतरिक इमरजेंसी 1975' पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें आपातकाल का ऐतिहासिक विश्लेषण
योगी आदित्यनाथ ने 'भारत आंतरिक इमरजेंसी 1975' पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें आपातकाल का ऐतिहासिक विश्लेषण
NewsPoint•
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अक्टूबर को अपने सरकारी आवास पर पूर्व मंत्री और भाजपा नेता शतरुद्र प्रकाश द्वारा लिखी गई पुस्तक 'भारत आंतरिक इमरजेंसी 1975' का विमोचन किया। इस पुस्तक में 1975 से 1977 के बीच के आपातकाल की अवधि, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदियाँ लगाई गई थीं, का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस अवसर पर भाजपा नेता रमेश मिश्रा और सीपी सिंह भी उपस्थित थे।
पुस्तक में आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल की कई घटनाएँ दर्ज हैं। इसमें विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का जिक्र किया गया है। साथ ही, समाचार पत्रों पर सेंसरशिप और नागरिक स्वतंत्रताओं में लगी पाबंदियों को भी शामिल किया गया है। यह अवधि भारतीय लोकतंत्र की एक कठिन अवधि के रूप में पेश की गई है। पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलनों, जबरन नसबंदी, गरीब बस्तियों को हटाने की समस्याओं और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख है।शतरुद्र प्रकाश ने अपनी राजनीतिक यात्रा और आपातकाल के दौरान किए गए विरोध कार्यों का भी संक्षिप्त में जिक्र किया है। उन्होंने 1968 से 1973 के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति की। इसके बाद उन्होंने बनारस में गरीबों की बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष किया। 1974 में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में सबसे युवा विधायक के रूप में प्रवेश किया।
पुस्तक में उनकी पत्नी अंजना प्रकाश की गिरफ्तारी और भूमिगत रहकर निषेध के खिलाफ कार्यकर्ताओं की गतिविधियों का भी ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा, "रणभेरी" नामक साइक्लोस्टाइल बुलेटिन के माध्यम से आपातकाल विरोधी विचारों और लोकतांत्रिक अधिकारों के संदेशों का प्रसार किया गया था। शतरुद्र प्रकाश द्वारा लिखी गई यह पुस्तक उन लोगों के संघर्ष को उजागर करती है जिन्होंने इस कठिन समय में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।