फराह खान की माथे पर टीका लगाने से मना करने पर ट्रोलिंग, जानें पूरी घटना
फराह खान की माथे पर टीका लगाने से मना करने पर ट्रोलिंग, जानें पूरी घटना
NewsPoint•
फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो रही हैं। हाल ही में, उन्होंने एक इवेंट में माथे पर टीका लगवाने से मना कर दिया था। ये घटना दिल्ली में एक होटल की लॉबी में हुई थी, जहां उन्हें स्वागत के लिए आरती की थाली से सम्मानित किया गया। लेकिन जब एक स्टाफ सदस्य ने उन्हें माथे पर टीका लगाने की कोशिश की, तो उन्होंने मना कर दिया और सिर्फ कलाई पर टीका लगवाया। इस रिएक्शन के बाद से लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। एक यूजर ने फराह की आलोचना करते हुए लिखा, "फराह खान को बुरा लग जाता है जब एक महिला स्वागत के तौर पर उन्हें टीका लगाती है। सोचिए, नेल पॉलिश लगाना जो इस्लाम में हराम है, वो पहन रही हैं लेकिन टीका लगाने से नाराज हो रही हैं क्योंकि नेल पॉलिश स्टाइल है और टीका हिंदू परंपरा है। बॉलीवुड के तथाकथित सेलेब्स का यही क्लासिक रूप है।" एक दूसरे ट्रोलर ने कहा, "फराह खान ने पहले फूलों की बारिश से मना किया, फिर माथे पर कुमकुम लगाने से साफ मना कर दिया। जब उन्हें पता है कि वहां ऐसे प्रोसीजर होंगे, तो वे ऐसी जगहों पर जाते ही क्यों हैं? कुछ लोगों को बस कॉन्ट्रोवर्सी खड़ी करने की खुजली होती है। क्या फराह खान को इस तरह से बेइज्जती करना शोभा देता है? जिन्होंने उन्हें बुलाया, वे भी उतने ही बेवकूफ हैं।"
इसके अलावा, एक यूजर ने फराह से सवाल किया, "वह पब्लिक में सेक्युलर दिखती हैं, अगर ऐसा है तो सेक्युलर फराह खान ने माथे पर टीका लगाने से मना क्यों किया?"
फराह खान भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर हैं। उन्होंने अपने करियर में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कई गानों को कोरियोग्राफ किया है। उन्होंने 2004 में फिल्म 'मैं हूं ना' से डायरेक्शन में कदम रखा। इसके बाद, 2007 में 'ओम शांति ओम' बनाई। इसके अलावा, उन्होंने 2010 में 'तीस मार खान' और 2014 में 'हैप्पी न्यू ईयर' जैसी म्यूजिकल फिल्मों का भी डायरेक्शन किया।
हालांकि, अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि ये वीडियो किस इवेंट का है और वे वहां किस कार्यकम के लिए गई थीं। लेकिन उनके इस विवाद ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बढ़ाई है। ट्रोलर्स का कहना है कि फराह खान को सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह की परंपराओं से बचना चाहिए।
इस विवाद ने दिखा दिया है कि कैसे एक छोटी सी घटना पर भी विवाद खड़ा हो सकता है। फराह की सोच पर सवाल उठाने वाले यूजर ने सही कहा कि कई बार हमें अपने कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब हम पब्लिक में हों। साथ ही, उनकी यह स्थिति दर्शाती है कि हम सभी को दूसरों के रीति-रिवाजों का सम्मान करने की जरूरत है।