प्रधानमंत्री मोदी की सराहना, पंजाब की 'खेती विरासत मिशन' संस्था बढ़ावा दे रही है जैविक खेती को

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Navbharat Times
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब की 'खेती विरासत मिशन' संस्था की सराहना की है, जिसने जैविक खेती और पारंपरिक कृषि के तरीकों को पुनर्जीवित करने का कार्य प्रारंभ किया है। 25 अक्टूबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में, पीएम मोदी ने इस संस्था के प्रयासों की तारीफ करते हुए बताया कि इससे न केवल किसानों को लाभ हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी मदद मिल रही है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 'नव-त्रिन्जन' नाम की एक पहल चल रही है, जिसमें रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं किया जाता।

पीएम मोदी ने कहा, "हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं। सुखद ये है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेकविध नए प्रयोग भी हो रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल के तहत प्राकृतिक रंगों वाली कपास उगाई जाती है, जिससे कपड़े रंगने के लिए किसी केमिकल की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे पर्यावरण को काफी लाभ हो रहा है।
'खेती विरासत मिशन' के अंतर्गत बुनाई का एक स्कूल भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य बुनकरी के कौशल को नई पीढ़ी में प्रसारित करना है। इस स्कूल ने कई महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है। पीएम मोदी ने रमनदीप कौर का उदाहरण दिया, जो पहले एक मजदूर थीं, लेकिन बुनाई की ट्रेनिंग लेने के बाद अब वे एक कुशल बुनकर के रूप में जानी जाती हैं।

पीएम मोदी ने कहा, "रेखा रानी ने ट्रेनिंग लेने से पहले कभी हैंडलूम देखा तक नहीं था। उनकी ओर से बनाई गई शॉल भारत की राष्ट्रपति जी को भेंट की गई है।" उन्होंने सुनेहा देवी की भी प्रशंसा की, जिन्होंने पहले घरों में काम किया, लेकिन अब वे हैंडलूम पर अद्भुत कपड़ा तैयार कर रही हैं।

रजनी कौर के बारे में भी पीएम मोदी ने बताया, "उन्होंने पहले खेतों में मजदूरी की, लेकिन अब नए हुनर से उन्हें घर चलाने में मदद मिली है।" स्कूल से ट्रेनिंग के बाद कई महिलाएं अब स्वदेशी ऑर्गेनिक कपास से बने धागों का उपयोग कर कपड़े बना रही हैं। इससे उनके जीवन में खुशहाली आई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्होंने इन महिलाओं से मिलने का अवसर प्राप्त किया था और उनके काम के प्रति जुनून और समर्पण को देखकर वह काफी प्रभावित हुए थे। 'खेती विरासत मिशन' की समय-समय पर चलने वाली ये पहलें न केवल जैविक खेती को बढ़ावा देती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को पारंपरिक हुनर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाती हैं।

पीएम मोदी के अनुसार, इस प्रकार की पहलों से यह स्पष्ट है कि पारंपरिक कृषि और जैविक खेती के माध्यम से न केवल देश की कृषि को सशक्त किया जा सकता है, बल्कि इससे लोकल कल्चर और पहचान को भी मजबूत किया जा सकता है। अंततः, यह केवल कृषि की बात नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की जड़ों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहल है।

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