Historic Amendment In Womens Reservation Bill 273 New Seats Scst Women Will Also Get Reservation
महिला आरक्षण बिल में ऐतिहासिक संशोधन: 273 नई सीटें, SC/ST महिलाओं को भी मिलेगा आरक्षण
Others•
महिला आरक्षण कानून में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। परिसीमन के बाद लोकसभा में करीब 273 सीटें बढ़ेंगी। इन नई सीटों में से एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी इस कोटे का लाभ मिलेगा। यह कानून 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महिलाओं के आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन को 'ऐतिहासिक' बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून देश भर में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को काफी बढ़ाएगा। आठवले ने बताया कि परिसीमन (delimitation) के बाद लोकसभा में करीब 273 सीटें बढ़ सकती हैं, जिससे कुल सीटों की संख्या लगभग 816 हो जाएगी। इनमें से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कोटे के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं को भी आरक्षण मिलेगा।
आठवले के अनुसार, संसद का एक विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित होने की संभावना है। इसी सत्र में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा यह संशोधित विधेयक पारित किया जा सकता है। आपको बता दें कि ' नारी शक्ति वंदन अधिनियम ', जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है, 2023 में संसद से पारित हो चुका है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह संवैधानिक संशोधन के माध्यम से लाया गया कानून परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह कानून 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू हो जाएगा। इसके बाद, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी इसे लागू किया जाएगा। आठवले ने इस कदम को 'क्रांतिकारी' बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को न्याय मिलेगा और शासन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
आठवले ने आगे कहा कि आवश्यक संशोधनों के बाद आरक्षण की सीमा पर जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित होने की संभावना है, जिसे उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। यह कानून महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर प्रदान करेगा और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने में मदद करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि देश के विकास में महिलाओं की आवाज सुनी जाए और उनके हितों का ध्यान रखा जाए।