Mixed Reactions In India On Middle East Ceasefire Appeal For Peace
मध्य पूर्व तनाव: भारत में अमेरिका-ईरान सीजफायर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं, शांति की अपील
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मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर पर भारत में अलग-अलग विचार सामने आए हैं। धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है। देवबंदी विद्वान कारी इसहाक गोरा ने प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर को लेकर भारत में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है। देवबंदी विद्वान कारी इसहाक गोरा ने भारत की मोहब्बत और मिलाप की पहचान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की, जबकि जम्मू-कश्मीर मजलिस उलमा इमामिया के अध्यक्ष डॉ. आगा सैयद मुदासिर रिजवी ने इसे ईरान की जीत बताया और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत दिया। रामबन की शिया मुस्लिम महिला नुसरत मलिक ने भी ईरान की जीत पर खुशी जताई और अमेरिका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध किया।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच हुए दो हफ्तों के सीजफायर पर भारत में अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने शांति बनाए रखने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने पर जोर दिया है।प्रसिद्ध देवबंदी विद्वान और जमीयत दावत-उल-मुस्लिमीन के संरक्षक कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हिंदुस्तानियों की एक खास पहचान रही है। वे लड़ाई-झगड़े की बजाय प्यार और मेलजोल को ज्यादा पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं के साथ हमारे प्रधानमंत्री ने जिस तरह के रिश्ते बनाए हैं, वह वाकई काबिले तारीफ है। प्रधानमंत्री ने उनसे सलाह भी ली, जो एक बहुत अच्छी बात है। रिश्ते निभाना मुश्किल होता है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने इन रिश्तों को बखूबी निभाया है।
कारी इसहाक गोरा ने आगे कहा कि ईरान युद्ध के बाद दुनिया भर में जो हालात बने, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं से लगातार बातचीत जारी रखी, जो एक बहुत अच्छा कदम था। प्रधानमंत्री ने भी कोशिश की कि यह युद्ध किसी भी तरह से रुके। हमने भी प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस युद्ध को रुकवाने में मदद कर सकते हैं।
वहीं, जम्मू-कश्मीर मजलिस उलमा इमामिया के अध्यक्ष डॉ. आगा सैयद मुदासिर रिजवी ने अमेरिका-ईरान सीजफायर को ईरान के लिए जीत का ऐलान बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने जंग शुरू नहीं की थी, लेकिन दुश्मनों ने अचानक ईरान पर हमला करने की कोशिश की थी। ईरान न तो झुका और न ही कमजोर नजर आया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ईरान की जीत नहीं है, बल्कि दुनिया भर में जो भी लोग दबे-कुचले हैं, उन्हें राहत मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में एक सुपरपावर के सामने न झुकने की जो परंपरा रही है, उसे तोड़ा गया है।
डॉ. आगा सैयद मुदासिर रिजवी ने कहा कि भारत के लोगों ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि हम सब उनके साथ हैं। कश्मीरी भी उनका साथ देने में पीछे नहीं रहे। इस युद्ध से हर देश चिंतित था, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा था। तेल, गैस जैसी चीजों की समस्या हर देश को हुई। हर देश ने इस युद्ध को रोकने की कोशिश की, जिसमें भारत का भी अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि यह महसूस किया गया कि अगर अमेरिका और इजरायल को नहीं रोका गया, तो यह युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा सकता है। हालांकि यह सीजफायर सिर्फ दो हफ्तों के लिए है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि उन्होंने ईरान के सामने घुटने टेक दिए हैं।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव आया है, जिसे भारत और पाकिस्तान ने भी महसूस किया है। अरब देशों को भी यह सीख मिली है कि वे दूसरों पर निर्भर न रहें। इजरायल कोशिश कर रहा है कि समझौता न हो, क्योंकि वह युद्ध और खून-खराबा चाहता है। वह शांति समझौते को मानना नहीं चाहता। इन दो हफ्तों में अगर कोई विवाद हुआ तो इजरायल फिर से हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि जो दस मुद्दे रखे गए हैं, हो सकता है कि ईरान भी थोड़ा झुक जाए और अमेरिका भी कुछ समझौता करे, लेकिन नतीजे अच्छे सामने आ सकते हैं।
रामबन की शिया मुस्लिम महिला नुसरत मलिक ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि ईरान को विजय प्राप्त हुई है। जंग न हो, यह ईरान भी चाहता था, लेकिन शुरुआत अमेरिका ने की थी और उसे ही इसे खत्म करना था। कोई भी देश कैसे रहता है, कैसे शासन करता है और किन कानूनों का पालन करता है, यह उसके अपने आंतरिक मामले हैं। मेरा मानना है कि अमेरिका को इन मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।