Indias Sugar Production Rises 22 To 159 Crore Tonnes But Mills Financial Health Concerns
भारत का चीनी उत्पादन 22% बढ़ा: 2025-26 सत्र में 1.59 करोड़ टन तक पहुंचा
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भारत का चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में 22% बढ़कर 1.59 करोड़ टन हो गया है। गन्ने की अच्छी आपूर्ति और बेहतर पैदावार से उत्पादन बढ़ा है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन में वृद्धि देखी गई है। हालांकि, गन्ने की बढ़ती कीमतें और चीनी की गिरती कीमतों से मिलों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।
नई दिल्ली, 20 जनवरी: भारत का चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में 15 जनवरी तक 22 प्रतिशत बढ़कर 1.59 करोड़ टन हो गया है, जो गन्ने की अच्छी आपूर्ति और बेहतर पैदावार का नतीजा है। उद्योग संगठन इस्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले साल इसी अवधि में उत्पादन 1.3 करोड़ टन था। हालांकि, गन्ने की बढ़ती कीमतें और चीनी की गिरती कीमतों के कारण मिलों की आर्थिक हालत बिगड़ रही है, जिससे किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। इस्मा ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द संशोधन की मांग की है ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके।
भारतीय चीनी एवं बायो-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के अनुसार, इस साल 15 जनवरी तक देश में लगभग 518 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि पिछले साल इसी समय यह संख्या 500 थी। भारत में चीनी का सत्र अक्टूबर से शुरू होकर सितंबर तक चलता है।उत्पादन में सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र का योगदान खास रहा। यहां उत्पादन 42.7 लाख टन से बढ़कर 51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 64.5 लाख टन हो गया। उत्तर प्रदेश में भी उत्पादन बढ़ा है, जो 42.8 लाख टन से बढ़कर 46 लाख टन तक पहुंच गया। इसी तरह, कर्नाटक का उत्पादन भी 27.5 लाख टन से बढ़कर 31 लाख टन हो गया।
इस्मा ने कहा कि गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता, अच्छी पैदावार और प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में सुचारू रूप से काम चलने के कारण 2025-26 के सत्र में भारत के चीनी उद्योग ने अब तक अच्छी प्रगति की है।
लेकिन, इस अच्छी खबर के साथ एक चिंताजनक पहलू भी जुड़ा है। उद्योग निकाय ने चेतावनी दी है कि गन्ने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर चीनी की कीमतें गिर रही हैं। इस स्थिति के कारण चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें उनके गन्ने का भुगतान मिलने में देरी हो रही है।
इस्मा ने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतें गिरकर लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं। यह कीमत चीनी उत्पादन की लागत से काफी कम है। संस्था ने यह भी कहा कि देश में चीनी का भंडार बढ़ रहा है। इसके संकेत मिल रहे हैं कि किसानों को गन्ने के भुगतान का बकाया बढ़ना शुरू हो गया है। अगर यही हालात बने रहे तो यह बकाया और भी बढ़ सकता है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, इस्मा ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द से जल्द संशोधन करने की मांग की है। उनका मानना है कि एमएसपी बढ़ाने से मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिल पाएगा, जिससे पूरी चीनी इंडस्ट्री में वित्तीय स्थिरता बहाल होगी।