भारत ने 2024-25 में 70+ भगोड़ों का विदेश में पता लगाया, 203 विदेशी भगोड़े भारत में पकड़े गए

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भारत ने 2024-25 में विदेशों में 70 से अधिक भगोड़ों का पता लगाया। यह पिछले एक दशक में सबसे बड़ी संख्या है। इसी दौरान, भारत ने दूसरे देशों के लिए वांछित 203 भगोड़ों को पकड़ा। यह भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की बढ़ी हुई क्षमता को दर्शाता है। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की प्रगति को उजागर करती है।

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नई दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) भारत ने 2024-25 में विदेशों में 70 से ज़्यादा भगोड़ों का पता लगाया, जो पिछले एक दशक में सबसे बड़ी संख्या है। इसी दौरान, भारत ने दूसरे देशों के लिए वांछित 203 भगोड़ों को पकड़ा। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 71 ऐसे भगोड़ों को विदेश में ढूंढा। यह उपलब्धि भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की बढ़ी हुई क्षमता को दर्शाती है।

मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 27 भगोड़े या वांछित व्यक्ति विदेश से भारत लाए गए। यह जानकारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के कामकाज पर भी प्रकाश डालती है, जो भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी) के रूप में काम करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच, भारत ने विदेशों में 74 अनुरोध पत्र भेजे। इनमें से 54 सीबीआई से जुड़े थे, जबकि 20 राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के थे। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इन अनुरोधों में से 47 को पूरी तरह से पूरा किया, और 29 को आंशिक रूप से पूरा करने के बाद बंद कर दिया गया या वापस ले लिया गया।

पिछले साल 31 मार्च तक, दूसरे देशों के पास भारत से कुल 533 अनुरोध पत्र लंबित थे। इनमें से 276 सीबीआई मामलों से संबंधित थे और 257 राज्य पुलिस व अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े थे। इसके अलावा, भारत को विभिन्न देशों से आपराधिक मामलों में सहायता के लिए 32 अनुरोध पत्र मिले।

एनसीबी-भारत ने इस अवधि के दौरान उन भगोड़ों के लिए कई इंटरपोल नोटिस जारी किए, जिन्हें या तो मुकदमा चलाने के लिए या सजा काटने के लिए भारत वापस लाया जाना था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें 126 'रेड नोटिस' शामिल थे। रेड नोटिस का मतलब है कि दुनिया भर की पुलिस से किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने का अनुरोध किया जाता है, ताकि प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई हो सके।

इसके अलावा, 89 'ब्लू नोटिस' भी जारी किए गए। ब्लू नोटिस का उपयोग किसी व्यक्ति की पहचान, उसके ठिकाने या उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। 24 'येलो नोटिस' जारी किए गए, जो लापता व्यक्तियों के लिए वैश्विक पुलिस अलर्ट होते हैं। सात 'ब्लैक नोटिस' अज्ञात शवों से संबंधित अनुरोधों के लिए थे। एक 'ग्रीन नोटिस' भी जारी किया गया, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों के बारे में इंटरपोल द्वारा जारी की गई चेतावनी है।

यह रिपोर्ट भारत की अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भगोड़ों को पकड़ने की क्षमता में हो रही प्रगति को दर्शाती है। विदेश में भगोड़ों का पता लगाने में मिली सफलता, भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की बढ़ी हुई क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। यह उन अपराधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो सोचते हैं कि वे कानून से बच सकते हैं।