Keralas 86000 Crore High speed Rail 315 Hour Journey From Thiruvananthapuram To Kannur
केरल में हाई-स्पीड रेल: तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक 3.15 घंटे का सफर, 86,000 करोड़ की परियोजना
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केरल में जल्द ही हाई-स्पीड रेल की सौगात मिलेगी। तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक का सफर सिर्फ 3.15 घंटे में पूरा होगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना 86,000 करोड़ रुपये की होगी। इसका 70 प्रतिशत हिस्सा जमीन के ऊपर बनेगा। यह परियोजना राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यात्रा को बेहद सुविधाजनक बनाएगी।
केरल में जल्द ही हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की सौगात मिलने वाली है, जो तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक का सफर सिर्फ 3.15 घंटे में पूरा कर देगा। 'मेट्रोमैन' ई. श्रीधरन ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की औपचारिक घोषणा करने वाली है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के पूर्व प्रबंध निदेशक श्रीधरन ने बताया कि हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए एक कार्यालय स्थापित किया जा चुका है और 2 फरवरी से इस पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम शुरू हो जाएगा।
यह नई रेल परियोजना, जो वामपंथी सरकार की महत्वाकांक्षी 'सिल्वरलाइन' परियोजना की जगह लेगी, पांच साल में पूरी हो जाएगी। इसकी अनुमानित लागत 86,000 करोड़ रुपये से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी। इस कुल लागत में से 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी, जबकि बाकी का पैसा कर्ज के रूप में लिया जाएगा।श्रीधरन ने बताया कि इस हाई-स्पीड रेल लाइन का 70 प्रतिशत हिस्सा जमीन के ऊपर (एलिवेटेड) होगा, 20 प्रतिशत हिस्सा जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) होगा और केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही जमीन की सतह पर होगा। इस वजह से, 'सिल्वरलाइन' परियोजना की तुलना में इस नई परियोजना के लिए एक-तिहाई जमीन की ही आवश्यकता होगी। इतना ही नहीं, परियोजना पूरी होने के बाद, पिलर के आसपास की अतिरिक्त जमीन को खेती के लिए पट्टे पर दिया जाएगा।
यह हाई-स्पीड ट्रेनें आठ कोच वाली होंगी, जिनमें 560 यात्री सफर कर सकेंगे। इनकी अधिकतम गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और ये 22 स्टेशनों पर रुकेंगी। फिलहाल, यह हाई-स्पीड रेल लाइन कन्नूर तक ही जाएगी और कासरगोड तक नहीं पहुंचेगी। श्रीधरन ने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे कासरगोड या मंगलुरु तक बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
यह परियोजना केरल के लोगों के लिए यात्रा को बेहद सुविधाजनक बना देगी। लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा, जिससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जमीन अधिग्रहण की कम आवश्यकता और अतिरिक्त जमीन का सदुपयोग इसे एक पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजना बनाता है।