Pakistani Armys Atrocities In Balochistan Outrage Erupts Over Murder Of Young Laborer Sensation After Body Of Ajmal Abducted From Gwadar Found
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का अत्याचार: युवा मजदूर की हत्या पर भड़का आक्रोश
Others•
बलूचिस्तान में एक और युवा मजदूर की हिरासत में हत्या कर दी गई है। बलूच यकजेहती कमेटी ने पाकिस्तानी हुकूमत पर जबरन लोगों को गायब करने और मारने का आरोप लगाया है। ग्वादर से अगवा किए गए अजमल का शव मिलने के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं। यह घटना बलूचिस्तान में बढ़ते दमनकारी माहौल को दर्शाती है।
बलूचिस्तान में एक और युवा मज़दूर की कथित तौर पर हिरासत में हत्या कर दी गई है। बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने पाकिस्तानी हुकूमत पर इल्ज़ाम लगाया है कि वे बलूचिस्तान में ज़बरदस्ती लोगों को गायब करने और हिरासत में मारने का "सोचा-समझा अभियान" चला रहे हैं। यह घटना तब सामने आई जब 21 अगस्त 2025 को ग्वादर से अगवा किए गए अजमल नाम के एक मज़दूर का शव मिला। अजमल, जो नसीराबाद के तुरबत ज़िले के केच इलाके का रहने वाला था, अपने गरीब परिवार का इकलौता सहारा था और दिहाड़ी मज़दूरी करके घर चलाता था। 256 दिनों तक उसके परिवार ने उम्मीद लगाई कि वह सुरक्षित लौट आएगा, लेकिन उसकी मौत की खबर ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं।
BYC ने इस घटना को "इंसानी हक़ और गरिमा का घोर उल्लंघन" बताया है। उन्होंने कहा कि किसी को बिना मुकदमा चलाए मार देना और फिर उसका शव परिवार को सौंप देना, बलूचिस्तान में बढ़ते दमनकारी माहौल को दिखाता है। यह घटना प्रांत में लगातार हो रही गुमशुदगियों के पैटर्न पर गंभीर सवाल उठाती है। समिति ने पूछा कि और कितनी माओं को अपने बच्चों के लौटने का इंतज़ार करते-करते दर्द सहना पड़ेगा, जो कभी लौट कर नहीं आए।समिति ने दुनिया भर के इंसानी हक़ संगठनों से फौरन इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने बलूचिस्तान में बिगड़ती इंसानी हक़ की स्थिति को "गंभीर" बताया है। BYC ने इंसाफ और जवाबदेही की मांग की है।
बलूचिस्तान में ज़बरदस्ती लोगों को गायब करने का चलन चिंताजनक है। कुछ लोगों को बाद में छोड़ दिया जाता है, जबकि कुछ लंबे समय तक जेल में रहते हैं या फिर उन्हें निशाना बनाकर मार दिया जाता है। इन हक़ों के उल्लंघन से स्थानीय लोगों में असुरक्षा और अविश्वास बढ़ा है। लगातार हो रही मनमानी गिरफ्तारियां और जवाबदेही की कमी बलूचिस्तान को अस्थिर कर रही है। इससे शांति, इंसाफ और सरकारी संस्थाओं में लोगों का भरोसा बहाल करने के प्रयासों को नुकसान पहुंच रहा है।
BYC ने अपने X हैंडल पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अजमल को 21 अगस्त 2025 को ग्वादर से अगवा किया गया था। वह तुरबत ज़िले के केच इलाके के नसीराबाद का रहने वाला था। वह एक गरीब परिवार से था और दिहाड़ी मज़दूरी करके अपने रिश्तेदारों का पेट पालता था। 256 दिनों तक उसके परिवार ने उसे वापस लाने की उम्मीद में इंतज़ार किया। लेकिन जब उसका शव मिला, तो परिवार का दिल टूट गया। इस घटना ने बलूच कार्यकर्ताओं और इंसानी हक़ के पैरोकारों में गुस्सा भर दिया है।
समिति ने कहा कि किसी भी इंसान की जान लेना और फिर बिना किसी सुनवाई के उसका शव परिवार को देना, बलूचिस्तान में बढ़ते दमन का सबूत है। उन्होंने कहा कि यह "इंसानी हक़ और इंसानी गरिमा का घोर उल्लंघन" है। समिति ने सवाल उठाया कि ऐसे कितने परिवार हैं जो अपने बिछड़े हुए लोगों का इंतज़ार करते-करते टूट जाते हैं।
BYC ने दुनिया से मदद मांगी है। उन्होंने वैश्विक इंसानी हक़ संगठनों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान की बिगड़ती इंसानी हक़ की स्थिति पर तुरंत ध्यान दें। वे इंसाफ और जवाबदेही चाहते हैं।
बलूचिस्तान में लोगों का अचानक गायब हो जाना एक आम बात हो गई है। कुछ लोग वापस आ जाते हैं, लेकिन कई लोग या तो लंबे समय तक जेल में रहते हैं या फिर उन्हें मार दिया जाता है। इन घटनाओं से लोगों में डर और शक पैदा हो गया है। जब सरकार किसी को भी कभी भी गिरफ्तार कर सकती है और कोई जवाबदेही नहीं होती, तो बलूचिस्तान में शांति और भरोसा कायम करना मुश्किल हो जाता है।