स्थायी समाधान ज़रूरी

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demand for permanent reforms in nta supreme court cites upsc as example
कोई भी सिस्टम फूलप्रूफ होने का दावा नहीं कर सकता, खासकर जब आठ साल में उसने राष्ट्रीय स्तर की 270 से ज्यादा परीक्षाएं कराई हों, जिनमें 6.6 करोड़ स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड हों। नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े ये आंकड़े पिछले महीने राज्यसभा में पेश किए गए थे। लेकिन, सवाल यह है कि कोई संस्था गलतियों से कितना सीखती है और आगे के लिए क्या सुधार करती है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान यही अहम बात सामने आई।

सुधार का रोडमैप । शीर्ष अदालत ने सुधारों को स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत बताई है। अस्थायी उपाय के बजाय ऐसे कदम उठाए जाएं, जिनसे संस्थागत क्षमता लंबे समय तक मजबूत हो। अदालत ने सरकार से NTA में किए गए सुधार पर ठोस रोडमैप मांगा है और पूछा है कि अब तक क्या-क्या किया गया।
UPSC इसलिए उदाहरण । सुप्रीम कोर्ट के सवाल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता केवल प्रश्नपत्र तैयार करने या किसी तरह परीक्षाएं करा देने से तय नहीं होतीं। समय के साथ उनको अपनी तकनीकी क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और विशेषज्ञता विकसित करनी पड़ती है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन ( UPSC ) केवल इसलिए उदाहरण नहीं है, क्योंकि इसके पास देश की प्रतिष्ठित परीक्षाएं हैं, बल्कि इसलिए है कि इसने इस काम को पूरी तरह साध लिया है। UPSC ने समय के साथ बदलावों को अपनाया और उनको कामकाज का हिस्सा बनाया।

तकनीक का इस्तेमाल । इसी साल आयोग ने सिविल सर्विसेज प्री में पहली बार एग्जाम सेंटर्स पर उम्मीदवारों के रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था शुरू की, ताकि फर्जीवाड़े को पूरी तरह रोका जा सके। नैशनल ई-गवर्नेंस डिविजन के माध्यम से विकसित स्वदेशी प्रणाली का इस्तेमाल सभी 2,072 सेंटर्स पर किया गया। NTA को भी इसी तरह institutional memory विकसित करनी होगी। इसमें तकनीक अहम हो जाती है।

अपने विशेषज्ञ । सरकार ने हालिया विवादों के बाद टेस्टिंग एजेंसी में बदलाव की शुरुआत कर दी है। पिछले दिनों करीब 600 सब्जेक्ट एक्सपर्ट हटाए गए। कई नई नियुक्तियां की जा रही हैं। अभी तक एजेंसी डेप्युटेशन और contractual वर्कफोर्स पर बुरी तरह आश्रित रही है। सरकार के मुताबिक, NTA में केवल 39 स्थायी पद थे। काम के दबाव को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के सुझाव पहले भी आ चुके हैं। एग्जाम दर एग्जाम का उनका अनुभव ही एजेंसी को उन गड़बड़ियों से दूर रखने में मदद करेगा, जिनकी वजह से अभी विवाद खड़े हो रहे हैं।

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