शिवसेना (यूबीटी) का आरोप: मतदाता सूची में भ्रष्टाचार भाजपा का नया हथियार, 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम खतरे में

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शिवसेना (यूबीटी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की चुनाव प्रक्रिया की तारीफ को एक अपराधी द्वारा दूसरे को चरित्र प्रमाणपत्र देने जैसा बताया है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में छपे संपादकीय में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में हेरफेर करके चुनाव जीते गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र में 'एसआईआर' (विशेष गहन जांच) अभियान के तहत 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में भ्रष्टाचार और घोटाला भाजपा का नया हथियार बन गया है, जिसे कुंद करने की जरूरत है।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप को भारत की चुनाव प्रक्रिया आदर्श और पारदर्शी लगती है, तो उन्हें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपनी पूरी टीम के साथ अमेरिका ले जाकर वहां चुनाव करवाने चाहिए। पार्टी का मानना है कि ज्ञानेश कुमार ट्रंप की मर्जी के मुताबिक चुनाव करवाकर अमेरिका की लोकशाही का भी बंटाधार कर देंगे, ठीक वैसे ही जैसे भारत की लोकशाही का हुआ है। संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया कि ट्रंप की प्रशंसा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा जोरदार चर्चा शुरू कर दी गई है, जो कि एक अपराधी द्वारा दूसरे अपराधी को चरित्र प्रमाणपत्र देने जैसा है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में 'एसआईआर' अभियान के जरिए चुनाव आयोग ने 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं को अयोग्य ठहराने का बड़ा काम अंतिम चरण में पहुंचा दिया है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को जटिल और भ्रम पैदा करने वाला बताया गया। शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि ऐसे राज्य में जहां स्कूलों के हेडमास्टर शराब पीकर गिर पड़ते हैं, बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए रास्ते नहीं हैं, आश्रमशाला की लड़कियां सांप के काटने से मर जाती हैं, और गरीबों को अपना काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, वहां पिछड़ा हुआ मतदाता मतदाता पुनरीक्षण की लड़ाई में कैसे टिक पाएगा?

शिवसेना (यूबीटी) ने पिछले चुनावों के उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के समय 80 लाख मतदाताओं को हटाया गया और उसी के बल पर भाजपा सत्ता में आई। बिहार में भी ऐसा ही खेल खेला गया। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के दौरान अचानक 42 लाख मतदाता बढ़ा दिए गए थे, जिनका कोई ब्योरा महाराष्ट्र का चुनाव आयोग नहीं दे सका। पार्टी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के हवाले से कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में घोटाला हुआ है। मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लिकेट मतदाताओं को संरक्षण देना और उनके नाम पर फर्जी मतदान करवाना जैसे उद्योग चुनाव के समय चलाए गए। इसे कोई आदर्श चुनाव पद्धति नहीं माना जा सकता।

अब फिर से राज्य के 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का अस्तित्व खतरे में आ गया है। इस पर आयोग का कहना है कि 75.52 लाख मतदाताओं ने सूची में नाम दर्ज कराने में उदासीनता दिखाई, और 17 लाख मतदाताओं के नाम डुप्लिकेट होने के कारण हटा दिए गए। आयोग का दावा है कि अब एक स्वच्छ, पवित्र मतदाता सूची प्रकाशित होगी। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में लाखों डुप्लिकेट मतदाताओं ने अलग-अलग जगहों पर मतदान किया, जिसके सबूत देने के बावजूद चुनाव आयोग या कोर्ट ने कोई दखल नहीं लिया। ठाणे लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार राजन विचारे ने लाखों डुप्लिकेट, फर्जी मतदाताओं के सबूत चुनाव आयोग और न्यायालय को दिए, लेकिन यह सब व्यर्थ साबित हुआ।

पार्टी ने कहा कि 'एसआईआर' का काम करने के लिए राज्य में एक लाख बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मैदान में उतरे। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी श्री चोकलिंगम ने सभी बीएलओ के सराहनीय काम की तारीफ की और कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के घरों में तीन-तीन बार मुलाकात की और बहुत मेहनत की। लेकिन, शिवसेना (यूबीटी) ने मुख्य सवाल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता पर उठाया। पार्टी ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा है? यही असली सवाल है।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी चोकलिंगम पर है, लेकिन देश का मुख्य चुनाव आयोग आदर्श और निष्पक्ष नहीं रहा है। पार्टी का कहना है कि यह भाजपा और अमित शाह का एजेंट है। संपादकीय में कहा गया कि पश्चिम बंगाल और बिहार के विधानसभा चुनावों में उनकी धांधली उजागर हो चुकी है। इसलिए महाराष्ट्र में 'एसआईआर' के खेल में सभी विपक्षी दलों को बहुत सावधान रहना होगा।

पार्टी ने बताया कि महाराष्ट्र के 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिनमें करीब 35 लाख मृत मतदाता हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हजारों जिंदा मतदाताओं को मृत दिखाकर मतदान से वंचित किया गया। बिहार में एक विशेष धर्म के हजारों मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया और उनसे कहा गया कि "आप जिंदा हैं इसका 4 पीढ़ियों का सबूत लाओ तभी आप मतदाता माने जाओगे" - ऐसा आदेश दिल्ली के चुनाव 'तुगलकों' ने दिया।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा नए-नए तरीके ढूंढती रहती है, जो अक्सर विरोधियों के ध्यान में नहीं आते। इस बार बड़ी संख्या में 'जेन-जी' मतदाताओं के हटाए जाने का डर है, क्योंकि नए मतदाताओं के इस बड़े वर्ग ने मोदी-शाह-फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसलिए उनका वोट देने का अधिकार छीनने का प्रयास जरूर होगा, जिसे नाकाम करना होगा। पार्टी ने कहा कि पुणे, नागपुर, नाशिक, मुंबई, रायगढ़, छत्रपति संभाजीनगर के युवाओं ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किए हैं। इसलिए इन शहरों के युवा वर्ग को और अधिक सावधान रहना होगा। शिवसेना (यूबीटी) ने फिर दोहराया कि मतदाता सूची में भ्रष्टाचार और घोटाला ही भाजपा का नया हथियार है, और इस हथियार को अब कुंद करना होगा।

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