मिजोरम की अर्थव्यवस्था बदलेगी कलादान प्रोजेक्ट और बैराबी-साइरंग रेलवे लिंक: स्टडी कमेटी

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मिजोरम की अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने की क्षमता रखने वाली दो बड़ी परियोजनाओं, कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (केएमएमटीटीपी) और बैराबी-साइरंग रेलवे लिंक, के महत्व को उजागर करते हुए राज्य सरकार की एक स्टडी कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री लालदुहोमा को सौंपी है। यह रिपोर्ट इन परियोजनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आकलन करती है और इनसे अधिकतम लाभ उठाने के लिए आवश्यक तैयारियों पर प्रकाश डालती है। कमेटी ने समय से पहले रिपोर्ट सौंपकर अपनी दक्षता का परिचय दिया है।

राज्य सरकार की स्टडी कमेटी ने बुधवार को मुख्यमंत्री लालदुहोमा को अपनी फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (केएमएमटीटीपी) और बैराबी-साइरंग रेलवे लिंक मिजोरम की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदल सकते हैं। इन परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-साइरंग रेलवे लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर, 2025 को आइजोल में किया था। यह रेलवे लाइन मिजोरम के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस लाइन को आगे दक्षिण की ओर 200 किलोमीटर से भी ज्यादा बढ़ाकर म्यांमार सीमा के पास जोरिनपुई तक ले जाने का प्रस्ताव है। यह विस्तार केएमएमटीटीपी से जुड़ जाएगा। इससे मिजोरम सीधे म्यांमार के पालेटवा और सिटवे पोर्ट से जुड़ जाएगा। केएमएमटीटीपी के 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

कमेटी ने इन दो बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं का पूरा फायदा उठाने के लिए कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां तेजी से काम करने और तैयारी करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कमेटी के सदस्यों की तारीफ की कि उन्होंने तय समय से पहले ही रिपोर्ट तैयार कर ली। कमेटी को वैसे तो 12 महीने का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह काम सिर्फ 10 महीनों में ही पूरा कर दिया।

बैठक में रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें फील्ड स्टडी के नतीजों की समीक्षा भी शामिल थी। बातचीत का मुख्य जोर मिजोरम और म्यांमार के बीच सीमा-पार व्यापार की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर था। इसके अलावा, राज्य सरकार को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए राजस्व संग्रह और टैक्स सिस्टम को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी बात हुई। मिजोरम के उत्पादों को देश के बाकी हिस्सों और विदेशी बाजारों तक आसानी से पहुंचाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

कमेटी ने पाया कि मिजोरम के व्यापारी और लॉजिस्टिक्स सेवाएं देने वाले लोग पहले से ही मौजूदा व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों से लाभ उठा रहे हैं। कमेटी ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय व्यापारी अगर जखाई या बर्मी भाषा सीख लें तो उन्हें और भी ज्यादा फायदा हो सकता है। इससे सीमा के आर-पार बातचीत करना और व्यापारिक लेन-देन करना आसान हो जाएगा। कमेटी ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और लागू कानूनों व नियमों का पालन करने के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

रेलवे कनेक्टिविटी के प्रभाव के बारे में, कमेटी ने कहा कि राज्य में नियमित रेलवे सेवाएं शुरू होने के बाद 'इनर लाइन परमिट' सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करना बहुत महत्वपूर्ण होगा। अपनी स्टडी के एक हिस्से के तौर पर, कमेटी ने अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और पश्चिम बंगाल का दौरा किया। वहां उन्होंने बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के साथ उनके अनुभवों को समझा और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आकलन किया। इन दौरों के दौरान, मिजोरम द्वारा रेलवे कनेक्टिविटी आने के तुरंत बाद 'इम्पैक्ट स्टडी कमेटी' बनाने के फैसले की काफी सराहना की गई।

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