Hcs Sharp Remark On Officials Arbitrariness Respect Court Orders Delay Not Tolerated
अधिकारी अदालती आदेशों से मनमाने ढंग से नहीं निपट सकते: HC
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT न्यूज, लखनऊ : हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से देरी से दाखिल एक विशेष अपील को खारिज करते हुए अधिकारियों के अदालती आदेशों के प्रति रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी और विधि अधिकारी परिसीमा की अवधि से भली-भांति परिचित होने के बावजूद मामलों को ऐसे निपटाते हैं, जैसे उनके पास इसके लिए असीमित समय हो। अदालत ने कहा कि कोर्ट को राज्य की सुस्ती और लापरवाही का सरोगेट नहीं बनाया जा सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण हुई देरी को हर बार माफ नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने 124 दिन देरी से दाखिल विषेश अपील की देरी माफ करने की राज्य सरकार की अर्जी खारिज कर दी और इसके परिणामस्वरूप विशेष अपील भी परिसीमा से बाधित होने के कारण खारिज कर दी।
मामला रिटायर्ड सहायक निरीक्षक, सिविल पुलिस सोमराज सिंह से जुड़ा है। एकल पीठ ने 19 सितंबर 2024 को आदेश दिया था कि उनसे वसूली गई 83,562 रुपये की राशि वापस की जाए। साथ ही राज्य को उनका अंतिम आहरित वेतन कानून के अनुसार, उन्हें सुनवाई का अवसर देकर पुनर्विचार करने की अनुमति दी थी। राज्य सरकार ने बताया कि आदेश की जानकारी 21 सितंबर 2024 को मिली। इसके बाद मामला विधिक राय के लिए मुख्य स्थायी अधिवक्ता के पास भेजा गया, जिनकी राय 18 अक्टूबर को मिली। 23 अक्टूबर को प्रस्ताव शासन को भेजा गया और विधि एवं न्याय विभाग ने दो दिसंबर को अपील दाखिल करने की अनुमति दी। इसके बाद 20 फरवरी 2025 को विशेष अपील दाखिल की गई।