ORS बना संजीवनी

नवभारतटाइम्स.कॉम
ors the lifeline that saved millions of lives in the 1971 war
1971 में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से बचने के लिए लाखों लोग पूर्वी पाकिस्तान से भारत में शरण लेने पहुंचे। लेकिन, यहां शिविरों में एक और मुश्किल आ खड़ी हुई, हैजा। साफ पानी और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में बीमारी तेजी से फैलने लगी। जान बचाने के लिए ग्लूकोज की बोतल और आईवी सेट ही प्रमुख उपचार थे, लेकिन लाखों मरीजों के सामने यह बहुत कम था। संकट की इस घड़ी में डॉ. दिलीप महालानबिस ने उम्मीद की नई राह दिखाई। उनकी सलाह पर नमक और चीनी के पाउडर को पानी में घोलकर मरीजों को पिलाया जाने लगा। यह घोल ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन ( ORS ) बना। नतीजा चमत्कारिक था। कुछ ही सप्ताह में मौतों में भारी कमी आई और बीमारी पर नियंत्रण पा लिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने भी ORS को स्वीकार किया। बाद में द लैंसेट जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में इस पर आर्टिकल पब्लिश हुआ और ओआरएस पूरी दुनिया में हैजे व डिहाइड्रेशन के उपचार का साधन बन गया। डॉ. महालानबिस ने इसका पेटेंट नहीं कराया। उनके लिए मानव जीवन का मूल्य किसी आर्थिक लाभ से कहीं बड़ा था।

रेकमेंडेड खबरें