स्वतंत्रता के लिए जिम्मेदारी समझना भी बहुत ज़रूरी

Contributed byनील विमलकुमार|नवभारतटाइम्स.कॉम
the true meaning of freedom understanding responsibility and inner conflict
स्वतंत्रता के लिए हर व्यक्ति तरसता है। कोई भी प्रगतिशील समाज अपनी स्वतंत्रता को गर्व के साथ देखता है, लेकिन स्वतंत्रता जितनी मूल्यवान है, उसका दुरुपयोग उतना ही खतरनाक हो सकता है। असली चुनौती है कि हम स्वतंत्रता का इस्तेमाल किस तरह करते हैं, कितनी जिम्मेदारी समझते हैं।

दार्शनिक और ईसाई विचारक पौलुस ने मनुष्य के इसी आंतरिक संघर्ष को बहुत गहराई से समझा। उन्होंने स्वीकार किया कि मनुष्य कई बार वह कर बैठता है, जिसे वह करना नहीं चाहता और वह करने से चूक जाता है, जो उसे करना चाहिए। इस द्वंद्व ने मनुष्य को इतना व्यथित किया कि वह पुकार उठे, ‘मुझे इस स्थिति से कौन बचाएगा?’
पौलुस ने मनुष्य के भीतर काम करने वाले दो नियमों की बात की। एक ऐसा नियम, जो हमें नीचे खींचता है और दूसरा, जो हमें ऊपर उठाता है। इसे विमान के उदाहरण से समझा जा सकता है। हवाई अड्डे पर गुरुत्वाकर्षण विमान को जमीन से बांधे रखता है। लेकिन, उड़ान भरने के लिए अनुमति मिलते ही रनवे पर दौड़ता है। गुरुत्वाकर्षण तब भी रहता है, लेकिन वायुगतिकी का सिद्धांत उसे उठाता है। इसी तरह, ईश्वर मनुष्य की कमजोरियों को समाप्त किए बिना उसके भीतर ऐसी शक्ति जगाता है, जो उसे अपनी प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर स्वतंत्रता का उपयोग करना सिखाती है।

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