Bawali Betiyan Taught A New Definition Of Freedom Wonderful Confluence Of Art And Culture
आजादी की नई परिभाषा सिखा गया ‘बावली बेटियां’
नवभारत टाइम्स•
लखनऊ में महिंद्रा सनतकदा फेस्टिवल 2026 का दूसरा दिन कला और संस्कृति से सराबोर रहा। 'बावली बेटियां' नाटक ने महिलाओं की आजादी के संघर्ष को दर्शाया। वहीं, फैशन शो में लखनऊ और कोलकाता की रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।
लखनऊ में ' महिंद्रा सनतकदा फेस्टिवल 2026 ' का दूसरा दिन कला, संस्कृति और विचारों के मेल का गवाह बना। राजा राम पाल सिंह पार्क और अमीर-उद-दौला लाइब्रेरी में आयोजित इस उत्सव में शाम को पूर्वा नरेश के निर्देशन में 'बावली बेटियां' नाटक ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस नाटक ने आजादी के मायने समझाए और दिखाया कि कैसे महिलाएं समाज की बंदिशों में भी अपनी राह बनाती हैं। फैशन शो 'हुस्न-ए-कारीगरी' में लखनऊ और कोलकाता की कला का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां दोनों शहरों की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का प्रदर्शन हुआ।
'बावली बेटियां' नाटक ने आजादी के दोहरे चेहरे को दिखाया। स्वतंत्रता से पहले देश की आजादी के लिए बाहरी संघर्ष थे, तो वहीं आजादी के बाद महिलाओं को अपने ही घर और समाज में 'बेशर्म' और 'बेहया' जैसे ताने सुनने पड़ते थे। कलाकारों ने 'स्वाधीनता एक्सप्रेस' के जरिए अपने जीवन के उन पलों को साझा किया जब उन्होंने अपने शरीर और फैसलों पर अपना हक जताया। श्रीजोनी भट्टाचार्जी, अनामिका, दिलीप मिश्रा, शिमली बसु जैसे कलाकारों के दमदार अभिनय ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।फेस्टिवल में 'हुस्न-ए-कारीगरी' नाम का फैशन शो सिर्फ कपड़ों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि लखनऊ और कोलकाता की रचनात्मकता का एक जीवंत संवाद था। कोलकाता की 'मुनमुन फैब' ने 'दमादम मस्त कलंदर' की धुन पर कांथा सिल्क की बारीक कढ़ाई दिखाई। 'द बिंदी प्रोजेक्ट' ने अपनी कलात्मक बिंदियों से मॉडलों के माथे पर लोक संस्कृति की छाप छोड़ी। वहीं, लखनऊ की 'ब्रीज कलेक्शन' ने गरारों और दुपट्टों की शान से नवाबी अंदाज़ को रैंप पर उतारा।
इस फैशन शो में 'इन आंखों की मस्ती...' गाने पर जब कथक की पारंपरिक चाल के साथ बेली डांस का मेल हुआ, तो पश्चिमी और भारतीय नृत्य शैलियों का खूबसूरत संगम देखने को मिला। यह फ्यूजन दर्शकों को बहुत पसंद आया। इस तरह, 'महिंद्रा सनतकदा फेस्टिवल 2026' ने कला, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर एक यादगार मंच प्रदान किया, जिसने सभी को सोचने और प्रेरित होने का मौका दिया।