High Courts Strict Stance Status Report Sought From Karnal And Nuh Judges On Delay In Pending Mp mla Cases
हाईकोर्ट ने पूछा-MP और MLA पर मामले की सुनवाई में देरी क्यों हो रही?
नवभारत टाइम्स•
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। करनाल और नूंह के जिला एवं सेशन जजों को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया है। 183 आपराधिक और 159 दीवानी मामले वर्षों से लंबित हैं।
चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने करनाल और नूंह (मेवात) के जिला और सेशन जजों को 15 दिनों के भीतर सभी लंबित मामलों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जारी किया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वह तुरंत दोनों न्यायाधीशों से रिपोर्ट तलब करें और तय समय सीमा में उसे रिकॉर्ड पर लाएं।
यह पहली बार नहीं है जब कोर्ट ने ऐसे निर्देश दिए हैं। इससे पहले 10 नवंबर 2025 और फिर 16 दिसंबर 2025 को भी ऐसे ही आदेश जारी किए गए थे। लेकिन, लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित जिलों से कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों की गंभीर अवहेलना माना है। सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि इन आदेशों के बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई है, जिससे हाईकोर्ट की निगरानी प्रक्रिया बाधित हो रही है।हाईकोर्ट के रिकॉर्ड और वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस समय पूर्व और वर्तमान सांसदों और विधायकों से जुड़े कम से कम 183 आपराधिक मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं। वहीं, 159 दीवानी मामले भी ऐसे ही नेताओं से संबंधित हैं, जिनका निपटारा सालों से अटका हुआ है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। करनाल और नूंह (मेवात) के सेशन जजों से मांगी गई रिपोर्ट में न केवल मामलों की वर्तमान स्थिति बतानी होगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करना होगा कि अब तक देरी क्यों हुई। साथ ही, आगे मामलों के निपटारे के लिए क्या ठोस समय सीमा तय की जा सकती है, इसका भी उल्लेख करना होगा।
कोर्ट का यह सख्त रवैया दर्शाता है कि वह नेताओं से जुड़े मामलों में हो रही देरी को लेकर गंभीर है। ऐसे मामलों का लंबा खिंचना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट की यह पहल उम्मीद जगाती है कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि करनाल और नूंह के जिला और सेशन जज इस बार हाईकोर्ट के आदेशों का कितना पालन करते हैं और क्या वे तय समय सीमा में विस्तृत रिपोर्ट पेश कर पाते हैं। यह रिपोर्ट न केवल देरी के कारणों को उजागर करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।