रीपो रेट में फिर होगी कटौती? मीटिंग आज से

नवभारत टाइम्स

आरबीआई की अहम बैठक आज से शुरू हो रही है। इस बैठक में रीपो रेट में कटौती की संभावना पर चर्चा होगी। पिछले साल फरवरी से अब तक रीपो रेट में 1.25 फीसदी की कटौती हो चुकी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।

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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय अहम बैठक आज से शुरू हो रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सरकार ने विकास को बढ़ावा देने वाला बजट पेश किया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि पिछले साल फरवरी से अब तक आरबीआई रीपो रेट (जिस दर पर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं) में 1.25 फीसदी (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती कर चुका है। ऐसे में एक्सपर्ट्स को लगता है कि इस बार दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, क्योंकि फिलहाल विकास या महंगाई को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं दिख रही है। हालांकि, कुछ लोगों की राय यह भी है कि कर्ज को और सस्ता करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में एक और कटौती कर सकता है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली छह सदस्यीय कमिटी अपने फैसले का ऐलान शुक्रवार को करेगी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, "ऐसा लगता है कि कमिटी इस बार रीपो रेट को जस का तस रखेगी। शायद ब्याज दरों में कटौती का दौर अब यहीं रुक जाए। बैंक तुरंत ब्याज दरें घटाने की हालत में नहीं हैं।"
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सरकार ने हाल ही में अपना बजट पेश किया है, जिसमें विकास पर खास ध्यान दिया गया है। पिछले साल फरवरी से अब तक आरबीआई ने रीपो रेट में 1.25 फीसदी की कटौती की है। रीपो रेट वह दर है जिस पर बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। इस कटौती का मकसद अर्थव्यवस्था में पैसे का प्रवाह बढ़ाना और कर्ज को सस्ता करना था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि फिलहाल न तो विकास दर को लेकर कोई बड़ी चिंता है और न ही महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है। ऐसे में आरबीआई शायद मौजूदा दरों को बनाए रखना चाहेगा।

हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि आरबीआई कर्ज को और भी सस्ता बनाने के लिए ब्याज दरों में एक और छोटी कटौती कर सकता है। यह कदम अर्थव्यवस्था को और गति देने में मदद कर सकता है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी शुक्रवार को अपने फैसले की घोषणा करेगी। यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा।