भारतीय हीरों की मांग बढ़ेगी, सेक्टर को मिलेगी मज़बूती: इंडस्ट्री एक्सपर्ट

नवभारत टाइम्स

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते से भारतीय जेम्स और जूलरी सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी टैक्स में कटौती से भारतीय हीरों की मांग बढ़ेगी। इससे निर्यातकों को फायदा होगा और कारीगरों की बनाई चीजें नए ग्राहकों तक पहुंचेंगी। यह समझौता सेक्टर को नई मजबूती देगा और कारोबार को पटरी पर लाएगा।

भारतीय हीरों की मांग बढ़ेगी, सेक्टर को मिलेगी मज़बूती: इंडस्ट्री एक्सपर्ट
मुंबई: भारत और अमेरिका के बीच हुए एक बड़े व्यापार समझौते का जेम्स और जूलरी इंडस्ट्री ने जोरदार स्वागत किया है। इस समझौते के तहत अमेरिकी टैक्स में भारी कटौती हुई है, जिससे भारतीय जेम्स और जूलरी के निर्यात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इंडस्ट्री का मानना है कि टैक्स कम होने से व्यापार बढ़ेगा, कारोबारियों का भरोसा लौटेगा और पूरे सेक्टर को नई जान मिलेगी।

जेम्स एंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया कि टैक्स में इस कटौती से अमेरिकी खरीदारों के लिए जेम्स और जूलरी की लागत कम हो जाएगी। इससे हीरा आभूषण बनाने वाले निर्माताओं को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, भारतीय हीरों की मांग बढ़ेगी और कंपनियों का कामकाज फिर से पटरी पर लौट आएगा। भंसाली को उम्मीद है कि इस समझौते के बाद भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले खुले हीरों और रंगीन रत्नों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे हीरा निर्यात को बहुत बड़ा सहारा मिलेगा।
ऑल इंडिया जेम एंड जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने इस टैक्स कटौती को भारतीय जेम्स और जूलरी सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक, यानी अमेरिका में व्यापार की रुकावटें कम होने से हमारे निर्यातकों की पकड़ मजबूत होगी। इससे हमारे कारीगरों द्वारा बनाई गई खूबसूरत चीजें अब नए ग्राहकों तक आसानी से पहुंचेंगी। इस समझौते ने अमेरिकी टैक्स को पहले के 25% (और कुछ मामलों में 50%) से घटाकर 18% कर दिया है। इससे निर्यात से जुड़े सेक्टरों पर जो पुराना बोझ था, वह अब हट गया है।

GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अमेरिकी टैक्स की वजह से कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा था। पॉलिश किए गए हीरों और रत्नों पर टैक्स पहले 0% था, जो बढ़कर 10% हो गया और फिर अगस्त तक 50% तक पहुंच गया था। इस भारी टैक्स की वजह से व्यापार करना लगभग नामुमकिन हो गया था। अब इस नए समझौते से इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली है।