रौजा-ए-काज़मैन में मना जश्न-ए-कायम, शायरों ने पेश किए कलाम

नवभारत टाइम्स

रौजा-ए-काज़मैन में इमाम हजरत इमाम मेहदी की विलादत के अवसर पर 'जश्न-ए-कायम' का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय महफिल में शायरों ने अपने कलाम पेश किए। मौलाना अम्मार काजिम जरवली ने अध्यक्षता की और नय्यर जलालपुरी ने संचालन किया। महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-कुराने पाक से हुई। इमाम जमाना (अस) की फजीलत बयान की गई।

celebration of imam mehdis birth in rauza e kazmain poets present verses
चौक में इमाम हजरत इमाम मेहदी की विलादत (जन्मदिन) के मौके पर ' जश्न-ए-कायम ' नाम से एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह कार्यक्रम रौजा-काजमैन, सआदतगंज में शनिवार को हुआ। इस महफिल की अध्यक्षता मौलाना अम्मार काजिम जरवली ने की और संचालन नय्यर जलालपुरी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत कारी युसूूफ मिर्जा ने तिलावते कुराने पाक (कुरान की तिलावत) से की। इस मौके पर मौलाना सैयद उरुजुल हसन मीसम रिजवी ने इमाम जमाना (अस) की शान और अहमियत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जब इमाम का जहूर (अवतार) होगा, तो वे दुनिया को इंसाफ और न्याय से भर देंगे।

इस खास महफिल में कई मशहूर शायरों ने अपनी शायरी पेश की। इनमें शहजादा गुलरेज, वफा हैदराबादी, फाजिल जरवली, मारूफ सिरसिवी, फरहान बनारसी, सुहेल बस्तवी, मुदस्सिर जौनपुरी, बिलाल काजमी, शमीम इलाहाबादी, बेताब हल्लौरी, मीर हिलाल रिजवी, चंदन फैजाबादी और अली शब्बर नौगावी शामिल थे। इन शायरों ने बारगाहे इमामे जमाना (इमाम की चौखट) में अपने कलाम (कविताएं) पेश किए। लोगों को उनकी शायरी बहुत पसंद आई और उन्होंने खूब दाद दी। लोगों ने 'नारे हैदरी या अली' के नारे भी लगाए।
इस मौके पर रौजा-ए-काजमैन को बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए सबीलें (पानी और शरबत के स्टॉल) भी लगाई गई थीं। यह आयोजन इमाम हजरत इमाम मेहदी के जन्मदिन के जश्न के तौर पर किया गया था, जिसमें लोगों ने उनकी फजीलत और अजमत को याद किया।