दिव्यांगों ने की विधायक की सदस्यता रद्द करने की मांग, की थी गलत टिप्पणी

नवभारत टाइम्स

दिव्यांगों ने भाजपा विधायक निर्मल वर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधायक पर दिव्यांगों के लिए अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है। प्रदर्शनकारियों ने विधायक की सदस्यता रद्द करने की मांग की। उन्होंने मंत्री नरेंद्र कश्यप के आवास पर धरना दिया। प्रशासन ने 21 फरवरी को बैठक का आश्वासन दिया है।

anger of the disabled demand to cancel mlas membership uproar over insulting remarks
गाजियाबाद में दिव्यांगों के स्वाभिमान की लड़ाई सोमवार को सड़कों पर उतर आई। विकलांग एवं विधवा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश चौहान के नेतृत्व में सैकड़ों दिव्यांगों ने एक पैदल मार्च निकाला। यह विरोध प्रदर्शन सीतापुर की बिसवां विधानसभा सीट से भाजपा विधायक निर्मल वर्मा के खिलाफ था, जिन्होंने कथित तौर पर दिव्यांगों के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि दिव्यांगों का अपमान करने वाले विधायक की विधानसभा सदस्यता तुरंत रद्द की जाए।

इस हंगामे की शुरुआत कलेक्ट्रेट से हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी सीधे प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप के आवास पर पहुंचे और गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। मंत्री के आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। वहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच थोड़ी नोकझोंक भी हुई। दिव्यांगों का कड़ा रुख देखते हुए प्रशासन ने बीच-बचाव किया। काफी मशक्कत के बाद यह आश्वासन मिला कि इस गंभीर मुद्दे पर 21 फरवरी को मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक औपचारिक मीटिंग करवाई जाएगी। इसके बाद सुरेश चौहान और उनके समर्थकों ने अपना धरना समाप्त किया। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि बैठक में विधायक के खिलाफ कार्रवाई का कोई रोडमैप तैयार नहीं हुआ, तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब भाजपा विधायक निर्मल वर्मा ने दिव्यांगों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की। इस टिप्पणी से आहत होकर दिव्यांगों ने अपने सम्मान की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया।

सुरेश चौहान, जो विकलांग एवं विधवा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उनके साथ सैकड़ों दिव्यांगों ने पैदल मार्च निकाला। उनकी मांग थी कि विधायक वर्मा के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए।

प्रदर्शनकारियों ने पहले कलेक्ट्रेट का रुख किया। वहां से वे सीधे प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप के आवास पर पहुंचे। उन्होंने मंत्री के आवास के गेट के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। इस दौरान, मंत्री के आवास पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच थोड़ी कहासुनी भी हुई।

दिव्यांगों के दृढ़ रुख को देखते हुए प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया। काफी बातचीत और जद्दोजहद के बाद, प्रशासन ने दिव्यांगों को आश्वासन दिया कि 21 फरवरी को मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक औपचारिक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा होगी।

यह आश्वासन मिलने के बाद, सुरेश चौहान और उनके समर्थकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि, समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 21 फरवरी की बैठक में विधायक के खिलाफ कार्रवाई की कोई योजना नहीं बनी, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।