बिना PUC चल रहे 3.77 लाख वाहन, ढाई लाख की उम्र पूरी

नवभारत टाइम्स

गाजियाबाद में 3.77 लाख से अधिक वाहन बिना प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से ढाई लाख वाहन अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं। यह स्थिति दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच चिंताजनक है। प्रशासन अब इन पुराने और बिना पीयूसी वाले वाहनों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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गाजियाबाद में हवा ज़हरीली होने की एक बड़ी वजह सड़कों पर बिना प्रदूषण जांच कराए दौड़ रहे लाखों वाहन हैं। आरटीओ में कुल 9.83 लाख वाहनों में से 3.77 लाख ऐसे हैं जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) नहीं है। यह स्थिति तब है जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जता चुका है और प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दे चुका है। सबसे ज्यादा डिफॉल्टर दोपहिया वाहन हैं, इसके बाद कारों का नंबर आता है। इनमें से करीब 2.50 लाख वाहन अपनी तय उम्र (पेट्रोल के लिए 15 साल और डीजल के लिए 10 साल) पार कर चुके हैं, जिन्हें कानूनन सड़क पर चलने की इजाजत नहीं है। प्रशासन अब इन लापरवाह वाहन मालिकों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, बिना पीयूसी वाले वाहनों की इतनी बड़ी संख्या का मुख्य कारण 'एंड ऑफ लाइफ' (ELV) यानी अपनी तय उम्र पूरी कर चुके वाहन हैं। गाजियाबाद में लगभग 2.50 लाख वाहन अपनी वैध समय सीमा पार कर चुके हैं। इन वाहनों की समयसीमा सॉफ्टवेयर में समाप्त दिखाई देती है, इसलिए प्रदूषण जांच केंद्रों पर इनका पीयूसी (PUC) जनरेट नहीं हो पाता। इसी वजह से ये वाहन डिफॉल्टरों की सूची में आ जाते हैं। विभाग अब ऐसे पुराने वाहनों को पहचान कर उनके पंजीकरण रद्द करने और उन्हें कबाड़ (स्क्रैप) घोषित करने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। इसका मकसद आंकड़ों को साफ करना और सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाले पुराने इंजन वाले वाहनों को हटाना है।
यह बात चिंताजनक है कि जो वाहन अभी भी सड़क पर चलने के लायक हैं और फिर भी प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं ले रहे हैं, वे शहर के पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। इन पर प्रशासन अब सख्ती बरतेगा। आरटीओ के आंकड़ों के अनुसार, कुल 9.83 लाख पंजीकृत वाहनों में से 3.77 लाख वाहन बिना प्रदूषण जांच के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह संख्या काफी बड़ी है और सीधे तौर पर हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

प्रदूषण जांच न कराने वालों में सबसे आगे दोपहिया वाहन, यानी बाइक और स्कूटर हैं। इसके बाद कारों का नंबर आता है। यह दिखाता है कि आम लोग भी प्रदूषण नियंत्रण के प्रति उतने गंभीर नहीं हैं, जितना उन्हें होना चाहिए। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं सीधे तौर पर हमारे फेफड़ों में जा रहा है।

कानून के मुताबिक, जो वाहन अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर लेते हैं, उनका पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं बनाया जा सकता। पेट्रोल वाहनों के लिए यह सीमा 15 साल और डीजल वाहनों के लिए 10 साल है। ऐसे वाहन सड़क पर चलने के लिए वैसे भी अनफिट माने जाते हैं। लेकिन फिर भी, ये वाहन सड़कों पर चल रहे हैं और प्रदूषण फैला रहे हैं। यह एक गंभीर विसंगति है जिस पर प्रशासन को ध्यान देना होगा।

प्रशासन अब इन लापरवाह वाहन मालिकों पर नकेल कसने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करने से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या भी नियंत्रित होगी। यह एक स्वागत योग्य कदम है जो गाजियाबाद की हवा को साफ करने में मदद करेगा।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीयूसी (PUC) का मतलब 'प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र' (Pollution Under Control Certificate) है। यह प्रमाण पत्र बताता है कि आपका वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदूषण फैला रहा है या नहीं। अगर आपका वाहन इस मानक पर खरा नहीं उतरता है, तो आपको इसे ठीक करवाना होगा। बिना पीयूसी के वाहन चलाना कानूनन अपराध है और इसके लिए जुर्माना भी हो सकता है।

गाजियाबाद में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और इसके पीछे कई कारण हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं उनमें से एक प्रमुख कारण है। जब लाखों वाहन बिना जांच के सड़कों पर दौड़ेंगे, तो हवा में जहर घुलना लाजिमी है। इसलिए, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने वाहनों का पीयूसी (PUC) समय पर करवाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।