Annual Exams For Bal Vatika To Fifth Class To Start From March 16 Know The Full Schedule
बाल वाटिका : तीसरी से पांचवी के एग्ज़ाम 16 मार्च से
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव के सरकारी स्कूलों में बालवाटिका तीन से पांचवीं तक के छात्रों की वार्षिक परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू होंगी। ये परीक्षाएं 25 मार्च तक चलेंगी। प्रश्न पत्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार किए जाएंगे। परीक्षा की तैयारी के लिए सैंपल पेपर भी जारी किए गए हैं।
गुड़गांव के सरकारी स्कूलों में बालवाटिका से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू होंगी। ये परीक्षाएं 25 मार्च तक चलेंगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने यह शेड्यूल जारी कर दिया है। प्रश्न पत्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (SCERT) तैयार करेगी। निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रिंसिपलों को इस बारे में निर्देश दे दिए हैं। परीक्षाओं की तैयारी को बेहतर बनाने के लिए सैंपल पेपर भी जारी किए गए हैं। ये सैंपल पेपर निपुण शिक्षक ऐप और SCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए प्रैक्टिस और रेमेडियल पीरियड (सुधारात्मक कक्षाएं) चलाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को यह भी ध्यान रखना है कि बच्चों पर परीक्षा का कोई दबाव न पड़े।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज दहिया ने बताया कि निदेशालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा। कक्षाओं में सिलेबस दोहराने के साथ-साथ बच्चों की मौखिक परीक्षाओं की तैयारी पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। स्कूल हेड को निर्देश दिया गया है कि वे तय समय पर ही परीक्षाएं कराएं।निदेशालय ने परीक्षाओं की तैयारी को मजबूत करने के लिए सैंपल पेपर भी जारी किए हैं। ये सैंपल पेपर निपुण शिक्षक ऐप और SCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए प्रैक्टिस और रेमेडियल पीरियड चलाने के निर्देश दिए गए हैं। रेमेडियल पीरियड का मतलब है कि जिन बच्चों को कुछ समझने में दिक्कत हो रही है, उन्हें अतिरिक्त कक्षाएं देकर मदद की जाएगी।
शिक्षकों को यह भी ध्यान रखना है कि बच्चों पर परीक्षा का कोई दबाव न पड़े। इसका मतलब है कि बच्चों को डराया-धमकाया न जाए, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज दहिया ने कहा कि निदेशालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा। कक्षाओं में सिलेबस दोहराने के साथ-साथ बच्चों की मौखिक परीक्षाओं की तैयारी पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। स्कूल हेड को निर्देश दिया गया है कि वे तय समय पर ही परीक्षाएं कराएं।