Surajkund Melas Folk Culture Confluence Laughter And Cultural Performances Captivate The Chaupal
लोक संस्कृति के बीच बड़ी चौपाल पर ठहाकों ने बांधा समां
नवभारत टाइम्स•
सूरजकुंड मेले का 11वां दिन पर्यटकों से गुलजार रहा। बड़ी चौपाल पर देश-विदेश के कलाकारों ने लोक नृत्य और संगीत से समां बांधा। हास्य कवि सम्मेलन ने दर्शकों को खूब हंसाया। हरियाणवी लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया। मेले में खरीदारी और खान-पान का भी आनंद लिया जा रहा है।
फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड मेले में बुधवार को 55 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। मेले का यह 11वां दिन था और अब तक कुल आठ लाख, तीन हजार पर्यटक इस मेले का लुत्फ उठा चुके हैं। देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। पर्यटक उत्तर प्रदेश के खाने का स्वाद ले रहे हैं और देश-विदेश की सांस्कृतिक झलक देखकर 'अनेकता में एकता' का संदेश महसूस कर रहे हैं।
मेले की मुख्य चौपाल पर देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। मिस्र, नाइजीरिया, इराक, रूस और कजाकिस्तान के लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक नृत्य और संगीत से अपनी संस्कृति का परिचय दिया। उनके रंग-बिरंगे कपड़े, जोशीली प्रस्तुतियां और पारंपरिक वाद्य यंत्रों ने माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। विदेशी कलाकारों ने हरियाणवी गानों पर भी डांस किया, जिससे 'सांस्कृतिक एकता' का संदेश मिला। दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बढ़ा रहे थे और अपनी यादों को कैमरों में कैद कर रहे थे। इस सांस्कृतिक मिलन ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को और मजबूत किया।मेले में एक जोरदार हास्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीईओ एफएमडीए गौरी मिड्ढा थीं। मंच पर डॉ. सुनील जोगी, डॉ. सुरेश अवस्थी, सरदार मनजीत सिंह, योगिता चौहान और अशरफ मेवाती ने प्रेम, समाज, राजनीति और व्यवस्था पर हास्य और व्यंग्य से भरी कविताएं सुनाईं। उनकी देशभक्ति, सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष और व्यंग्यपूर्ण रचनाओं ने श्रोताओं को खूब हंसाया और मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का खूब उत्साह बढ़ाया।
सूरजकुंड मेले में हरियाणवी लोक कलाकार अपनी बीन और बाजे की मधुर धुन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से पूरे मेला परिसर में जोश और ऊर्जा भर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और युवा बीन की धुन पर थिरकते हुए नजर आ रहे हैं। कलाकार लोक नृत्य और रागिनियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपने साथ नाचने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। पर्यटक हरियाणा की लोक संस्कृति , रीति-रिवाजों और परंपराओं की झलक का भरपूर आनंद ले रहे हैं। यह आयोजन लोक कला और सांस्कृतिक विविधता का एक अद्भुत संगम साबित हो रहा है।
मेले में पर्यटकों की भीड़ सुबह से ही देखी जा रही है। बुधवार को 55 हजार से अधिक लोग मेले में पहुंचे। यह मेले का 11वां दिन था और अब तक कुल आठ लाख, तीन हजार पर्यटक इस मेले का हिस्सा बन चुके हैं। मेले की चौपालों पर देश-विदेश के जाने-माने कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। इसके साथ ही, देश के विभिन्न राज्यों के स्टॉलों पर भी पर्यटकों की खरीदारी के लिए अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है। इस बार पर्यटक मेले के थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी खूब आनंद ले रहे हैं। मेले में देश-विदेश की सांस्कृतिक झलक एक ही मंच पर देखने को मिल रही है, जो 'अनेकता में एकता' का सुंदर संदेश दे रही है।
मुख्य चौपाल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग जमा रहा। यहां देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब लुभाया। मिस्र, नाइजीरिया, इराक, रूस और कजाकिस्तान के लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को पेश किया। उनके रंग-बिरंगे परिधान, ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुतियां और पारंपरिक वाद्य यंत्रों ने पूरे माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। विदेशी कलाकारों ने हरियाणवी गीतों पर भी नृत्य करके सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन यादगार पलों को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। इस सांस्कृतिक संगम ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को और भी मजबूत किया।
मेले में एक भव्य हास्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सीईओ एफएमडीए गौरी मिड्ढा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। मंच पर डॉ. सुनील जोगी, डॉ. सुरेश अवस्थी, सरदार मनजीत सिंह, योगिता चौहान और अशरफ मेवाती ने प्रेम, समाज, राजनीति और व्यवस्था जैसे विषयों पर हास्य और व्यंग्य से भरी कविताएं प्रस्तुत कीं, जिनसे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। देशभक्ति, सामाजिक विसंगतियों पर कटाक्ष और व्यंग्यपूर्ण रचनाओं ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। पर्यटकों ने तालियों के माध्यम से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
हरियाणवी लोक कला का जादू भी मेले में छाया रहा। यहां के हरियाणवी लोक कलाकार अपनी बीन और बाजे की मधुर धुन से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से मेला परिसर को उत्साह और ऊर्जा से भर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और युवा बीन की धुन पर नाचते हुए नजर आ रहे हैं। लोक नृत्य और रागिनियों के साथ-साथ कलाकार पर्यटकों को भी नृत्य में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। पर्यटक हरियाणा की लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं की झलक का आनंद ले रहे हैं। यह आयोजन लोक कला और सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत संगम के रूप में सामने आ रहा है।