Mobile Usage In Schools Schools Tighten Grip On Childrens Digital Safety Issue Advisory To Parents
स्कूलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर शिकंजा
नवभारत टाइम्स•
गाजियाबाद में मोबाइल गेम की लत से तीन बहनों की मौत के बाद गुड़गांव के स्कूल अलर्ट हो गए हैं। स्कूलों ने अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर अडवाइजरी जारी की है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की सलाह दी गई है।
गाजियाबाद में मोबाइल गेम की लत से तीन बहनों की मौत के बाद गुड़गांव के स्कूल हरकत में आ गए हैं। शहर के कई निजी स्कूलों ने अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सख्त हिदायत दी है। स्कूलों ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों का मोबाइल से जुड़ाव बढ़ा है, जो अब उनकी पढ़ाई और व्यवहार पर बुरा असर डाल रहा है। स्कूलों ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई छात्र ऑनलाइन गलत काम करता पाया गया तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें सस्पेंशन या स्कूल से निकालना भी शामिल है।
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों का मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों से नाता काफी गहरा हो गया था। अब जब स्कूल फिर से ऑफलाइन हो गए हैं, तब भी कई बच्चे जरूरत से ज्यादा समय मोबाइल स्क्रीन पर बिता रहे हैं। यह आदत उनके व्यवहार और पढ़ाई दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसी चिंता को देखते हुए गुड़गांव के स्कूल मैनेजमेंट ने अभिभावकों को डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक खास एडवाइजरी जारी की है।स्कूलों ने अभिभावकों से कहा है कि वे बच्चों को मोबाइल देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न समझें। यह देखना बहुत जरूरी है कि बच्चा मोबाइल का इस्तेमाल किस काम के लिए कर रहा है। वह कौन से ऐप्स और प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, इस पर भी नजर रखनी चाहिए। अभिभावकों को बच्चों से नियमित रूप से बातचीत करनी चाहिए और उनके मोबाइल इस्तेमाल की जांच करते रहना चाहिए।
स्कूल प्रबंधन ने खास तौर पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पूरी तरह दूर रखने की सलाह दी है। साथ ही, यह भी जोर दिया गया है कि बच्चे अपनी निजी जानकारी, फोटो, वीडियो या लोकेशन को सार्वजनिक न करें। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
कुछ स्कूलों ने तो इस मामले में और भी कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कोई छात्र आपत्तिजनक पोस्ट करता है या किसी भी तरह के ऑनलाइन दुरुपयोग में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे गंभीर मामलों में छात्र को स्कूल से निलंबित (सस्पेंड) भी किया जा सकता है या स्कूल से निकाला भी जा सकता है। यह कदम बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों से बचाने और उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।