क्वॉलिटी पर नहीं उठेंगे सवाल

नवभारत टाइम्स

भारतीय आंकड़ों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर अब विराम लगेगा। खर्च के वर्गीकरण में बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले 6 डिवीजंस थे, अब इन्हें बढ़ाकर 12 कर दिया गया है। इससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख मजबूत होगी। यह कदम देश की आर्थिक पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगा।

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भारत सरकार ने अपने आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। यह बदलाव IMF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए किया गया है। यूनाइटेड नेशंस स्टैटिस्टिक्स डिवीजन के नए नियमों के अनुसार, अब खर्च को पहले 6 की बजाय 12 मुख्य हिस्सों में बांटा जाएगा। इसके बाद इन हिस्सों को 43 ग्रुप्स, 92 क्लासेज और 162 सब-क्लासेज में विभाजित किया जाएगा। इस बदलाव से वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है।

यह नया वर्गीकरण भारत के आर्थिक आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएगा। इससे पहले, IMF जैसी संस्थाओं ने भारतीय आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठाए थे। अब, खर्च को अधिक विस्तृत श्रेणियों में बांटने से आर्थिक गतिविधियों की बेहतर समझ मिलेगी। यह कदम देश की आर्थिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
पहले खर्च को केवल 6 मुख्य डिवीजन्स में देखा जाता था। अब इसे बढ़ाकर 12 डिवीजन्स कर दिया गया है। यह एक महत्वपूर्ण सुधार है। इसके बाद, इन 12 डिवीजन्स को आगे 43 ग्रुप्स में बांटा जाएगा। फिर इन ग्रुप्स को 92 क्लासेज में और अंत में 162 सब-क्लासेज में विभाजित किया जाएगा। इस तरह, कुल 162 छोटी-छोटी श्रेणियां बन जाएंगी।

इस विस्तृत वर्गीकरण के कारण, जिन वस्तुओं के आधार पर आंकड़े तैयार किए जाते हैं, उनकी संख्या भी बढ़ गई है। पहले यह संख्या 299 थी, जो अब बढ़कर 358 हो गई है। इसका मतलब है कि अब हम पहले से कहीं ज्यादा बारीकी से आर्थिक खर्चों को ट्रैक कर पाएंगे। यह पारदर्शिता और सटीकता को बढ़ाएगा।