डेटा का न हो मिसयूज

नवभारत टाइम्स

बैंकों को अब ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। प्रस्तावित नियमों के तहत, एजेंटों या कर्मचारियों द्वारा डेटा का दुरुपयोग रोका जाएगा। रिकवरी एजेंसियों के कर्मचारियों का पिछला रिकॉर्ड भी अच्छी तरह जांचा जाएगा। यह जांच काम पर रखने से पहले और बाद में भी जारी रहेगी।

new rules for banks strict measures to prevent misuse of customer data
बैंकों को अब ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा का खास ध्यान रखना होगा। नए नियमों के तहत, बैंकों को यह पक्का करना होगा कि उनके एजेंट या कर्मचारी ग्राहकों की कोई भी निजी जानकारी गलत तरीके से इस्तेमाल न करें। साथ ही, जिन रिकवरी एजेंसियों को बैंक काम पर रखते हैं, उनके कर्मचारियों का पिछला रिकॉर्ड भी अच्छी तरह जांचना होगा। यह जांच एजेंट को नौकरी पर रखने से पहले और बाद में भी लगातार होती रहनी चाहिए। हाल ही में रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बिहार में एक कर्जदार के करीबी की मौत का मामला काफी चर्चा में रहा था।

इन नए नियमों का मकसद ग्राहकों की निजता को सुरक्षित रखना है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी तरफ से काम करने वाले किसी भी व्यक्ति से ग्राहकों की निजी जानकारी का दुरुपयोग न हो। इसके लिए, बैंकों को रिकवरी एजेंसियों के कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की पूरी जांच करनी होगी। यह जांच सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि समय-समय पर होती रहनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों के साथ बदसलूकी के कई मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं ने लोगों को काफी परेशान किया है। बिहार में हुई एक घटना, जिसमें एक कर्जदार के करीबी की मौत हो गई थी, ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया था। ऐसे मामलों को देखते हुए, सरकार और नियामक संस्थाएं ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही हैं।