Questions On Surajkund Accident Investigation The Same Officials Responsible For Safety Are Now Investigating
सूरजकुंड हादसे की जांच भी उन्हीं को दी, जो पहले सुरक्षा समिति में थे
नवभारत टाइम्स•
सूरजकुंड मेले में हुए झूला हादसे की जांच अब विवादों में है। रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच का जिम्मा उन्हीं अधिकारियों को दिया गया है जो पहले सुरक्षा समिति में थे। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सूरजकुंड मेले में हुए झूला हादसे की जांच अब सवालों के घेरे में है। हादसे को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच का जिम्मा उन्हीं अधिकारियों को सौंपा गया है, जिनकी जिम्मेदारी मेले के दौरान झूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी।
सूत्रों का कहना है कि झूला गिरने की इस जांच को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों को बचाया जा सके। दरअसल, मेले में झूलों की रोजाना जांच के लिए एक इंस्पेक्शन कमिटी बनाई गई थी। अब एडीसी की अध्यक्षता में जो नई जांच टीम बनी है, उसमें भी उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया है जो पहली कमिटी का हिस्सा थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो अधिकारी खुद सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे, वे अपनी ही गलतियों की निष्पक्ष जांच कैसे करेंगे?इस जांच की सुई उन्हीं अधिकारियों पर टिकी है। झूला इंस्पेक्शन कमिटी में पीडब्ल्यूडी के ईएक्सइएन (सिविल व इलेक्ट्रिकल), वाईएमसीए (YMCA) इलेक्ट्रिकल विभाग के अध्यक्ष, इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर फरीदाबाद के ईएक्सइएन, हरियाणा टूरिजम के ईएक्सइएन व जेई, फायर ब्रिगेड अधिकारी, एचएसवीपी एसडीओ और हरियाणा रोडवेज के मैकेनिकल इंचार्ज शामिल थे। वर्तमान जांच कमिटी में भी लगभग इन्हीं चेहरों को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है। इससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है।
सात फरवरी को हुए इस हादसे में एक पुलिस निरीक्षक की जान चली गई थी और 13 लोग घायल हुए थे। नियमों के अनुसार, ऐसी बड़ी घटनाओं में स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम से जांच करानी चाहिए। इससे सच्चाई सामने आ सके। लेकिन फरीदाबाद प्रशासन द्वारा पुरानी कमिटी के सदस्यों को ही जांच दल में रखना यह संकेत दे रहा है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
यह पूरा मामला सूरजकुंड मेले में हुई एक दुखद घटना से जुड़ा है। मेले में लगे झूले के गिरने से एक पुलिस निरीक्षक की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए। लेकिन जांच की प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगे हैं। जिस टीम को झूलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी टीम को हादसे की जांच का जिम्मा भी दे दिया गया है। यह स्थिति निष्पक्ष जांच पर संदेह पैदा करती है।
लोगों का कहना है कि जब अधिकारी अपनी ही जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे, तो वे अपनी गलती की जांच कैसे करेंगे? यह तो वही बात हुई कि चोर से ही चोरी का पता लगाने को कह दिया जाए। इस तरह की जांच से दोषियों को बचाने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए, यह जरूरी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हो, उसे सजा मिले। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और दोषियों को बख्शेगा नहीं। यह घटना भविष्य के लिए एक सबक होनी चाहिए ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।