`61 लाख लेने के बाद भी नहीं कराई फ्लैट की रजिस्ट्री

नवभारत टाइम्स

ग्रेटर नोएडा में एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल से फ्लैट की रजिस्ट्री के नाम पर 61 लाख रुपये ले लिए गए। फ्लैट मालिक ने पैसे लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराई। बार-बार टरकाने और धमकी देने पर पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने बीटा-2 कोतवाली को केस दर्ज कर जांच का आदेश दिया है।

61 lakhs swindled flat registry not done for retired colonel case registered on courts order
ग्रेटर नोएडा में एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल से 61 लाख रुपये लेने के बाद भी फ्लैट की रजिस्ट्री न करने का मामला सामने आया है। तमाम कोशिशों के बावजूद जब फ्लैट मालिक ने रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया, तो पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट ने बीटा-2 कोतवाली को इस मामले में केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है।

गुड़गांव के सेक्टर-56 में रहने वाले शंभूनाथ ठाकुर, जो 2023 में लेफ्टिनेंट कर्नल पद से रिटायर्ड हुए हैं, ने नवंबर 2023 में रियल एस्टेट से जुड़े राजू शर्मा से मुलाकात की। शंभूनाथ ठाकुर ग्रेटर नोएडा के सेक्टर चाई-1 की एडब्ल्यूएचओ गुरजिंदर विहार में एक फ्लैट खरीदना चाहते थे। राजू शर्मा ने उन्हें समीना अहमद उर्फ डिंपल और सौरभ उर्फ मार्शल (कानपुर) से मिलवाया। समीना ने एडब्ल्यूएचओ में अपना फ्लैट बेचने की बात कही। शंभूनाथ ने अपनी पत्नी संजीता ठाकुर के साथ मिलकर फ्लैट का सौदा डेढ़ करोड़ रुपये में तय किया और एक लाख रुपये टोकन मनी के तौर पर दे दिए।
कुछ समय बाद, समीना ने सौदे की रकम बढ़ा दी और फ्लैट की कीमत 1.73 करोड़ रुपये कर दी। गवाहों की मौजूदगी में समीना और शंभूनाथ के बीच एग्रीमेंट हुआ। फ्लैट ट्रांसफर के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और सोसायटी प्रबंधन के साथ जरूरी प्रक्रियाएं भी पूरी की गईं। शंभूनाथ ने कुल 61 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद, समीना बार-बार रजिस्ट्री के लिए टालमटोल करने लगी। पीड़ित का आरोप है कि जब भी वह रजिस्ट्री के बारे में बात करते, तो उनके साथ गाली-गलौज और धमकी दी जाती थी।

पीड़ित शंभूनाथ कानपुर भी गए थे। वहां उन्हें पता चला कि समीना और सौरभ के खिलाफ कानपुर नगर कमिश्नरेट के थाना कोतवाली में भी धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज है। इस जानकारी के बाद, पीड़ित ने कोर्ट का रुख किया। अदालत ने थानाध्यक्ष थाना-बीटा-2 को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में तुरंत केस पंजीकृत करें और पूरी जांच करें। यह मामला रियल एस्टेट में धोखाधड़ी का एक गंभीर उदाहरण है, जहां खरीदार को पैसे देने के बावजूद अपना हक नहीं मिल पा रहा है। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस इस मामले की तह तक जाएगी और दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास करेगी।