Faridabad Municipal Corporation Rs 580 Crore Embezzlement Challan Filed Against Nine Officers And One Contractor
गबन केस में नगर निगम के नौ अफसरों के खिलाफ चालान पेश
नवभारत टाइम्स•
फरीदाबाद नगर निगम में 5 करोड़ 80 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने नौ अफसरों और एक ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। फर्जी वर्क ऑर्डर के जरिए ठेकेदार को अवैध भुगतान किया गया। यह काम पहले ही पूरा हो चुका था, फिर भी दोबारा भुगतान हुआ।
फरीदाबाद में सरकारी पैसों के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने नगर निगम के नौ अधिकारियों और एक ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। यह मामला करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये के गबन से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत में यह चालान दाखिल किया गया है। इस मामले में पूर्व चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर, आरएसए नवीन कुमार, लोकल ऑडिटर हरगूलाल, ओआईए विशाल कौशिक, सतीश कुमार (अकाउंट ब्रांच), अकाउंट ब्रांच के अधीक्षक विनोद कुमार, क्लर्क नवीन रत्रा, राजेंद्र कुमार और ठेकेदार सतबीर सिंह के नाम शामिल हैं।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब तत्कालीन निगम पार्षद दीपक चौधरी ने अकाउंट ब्रांच से 2017 से 2019 तक हुए विकास कार्यों का हिसाब मांगा। उन्होंने जानना चाहा कि किस फंड से किस ठेकेदार को कितना पैसा दिया गया। दीपक चौधरी के अनुसार, उनके वार्ड में 27 ऐसे काम दिखाए गए थे जिनमें एक करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ था। इन कामों में नालियों की मरम्मत, इंटरलॉकिंग टाइलें लगाना और स्लैब डालना शामिल था। लेकिन हकीकत में वहां कोई काम हुआ ही नहीं था। जांच में ऐसे दस वार्ड सामने आए जहां काम न होने के बावजूद ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया था। कुल 10 वार्डों में करीब 50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दिखावा कर ठेकेदार द्वारा गबन करने की बात सामने आई थी। बाद में सरकार ने इस मामले की जांच ACB को सौंप दी।ACB की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि नगर निगम डिविजन-4, बल्लभगढ़ से वर्क ऑर्डर संख्या 1436, 1444, 1445, 1447, 1449 और 1456, जो 27 नवंबर 2018 को जारी हुए थे, वे विधिवत जारी ही नहीं किए गए थे। इसके बावजूद, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार कर लिए। इन फर्जी वर्क ऑर्डर के आधार पर आरोपी ठेकेदार सतबीर सिंह को 5 करोड़ 80 लाख 47 हजार 474 रुपये का अवैध फायदा पहुंचाया गया। इससे भी गंभीर बात यह सामने आई कि जिन कामों के लिए दोबारा भुगतान किया गया, वे काम पहले ही वर्क ऑर्डर संख्या 424/2015 के तहत पूरे हो चुके थे। यानी एक ही काम के लिए दो बार भुगतान कर दिया गया। यह पूरा खेल सरकारी पैसों की बंदरबांट का एक बड़ा उदाहरण है। ACB अब इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है और दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश में जुटी है। इस तरह के घोटालों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है और आम जनता के पैसों का दुरुपयोग होता है। यह मामला सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट लोगों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।