कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के वीसी को MDU का भी चार्ज

नवभारत टाइम्स

महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) रोहतक के वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह के रिटायर होने के बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. सोमनाथ सचदेवा को एमडीयू का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था नए वीसी की नियुक्ति तक जारी रहेगी। प्रो. सचदेवा शनिवार से एमडीयू का अतिरिक्त चार्ज संभालेंगे।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के वीसी को MDU का भी चार्ज
रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) के वाइस चांसलर (वीसी) प्रो. राजबीर सिंह शुक्रवार को रिटायर हो गए। उनके रिटायरमेंट के बाद नए वीसी की नियुक्ति में समय लगेगा। इस बीच, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. सोमनाथ सचदेवा एमडीयू का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे। यह फैसला यूनिवर्सिटी के चांसलर और हरियाणा के गवर्नर प्रो. असीम कुमार घोष ने लिया है। गवर्नर ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया है, जिसकी कॉपी सीएम के प्रधान सचिव, उच्च शिक्षामंत्री के वरिष्ठ सचिव और उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजी गई है, ताकि एमडीयू का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। प्रो. सोमनाथ सचदेवा शनिवार से एमडीयू का अतिरिक्त चार्ज संभालेंगे।

यह नियुक्ति तब हुई है जब दो दिन पहले ही वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की मीटिंग बुलाई थी। यह मीटिंग पदोन्नति और नई भर्तियों पर मुहर लगाने के लिए बुलाई गई थी। इस मामले में प्रो. राजबीर सिंह ने रजिस्ट्रार को भी सस्पेंड कर दिया था।
गवर्नर की तरफ से जारी किए गए लेटर के अनुसार, 21 फरवरी से जब तक कोई नियमित वाइस चांसलर नियुक्त नहीं हो जाता, तब तक प्रो. सोमनाथ सचदेवा एमडीयू का अतिरिक्त कार्यभार देखेंगे। यह व्यवस्था एमडीयू के दैनिक कामकाज को निर्बाध रूप से चलाने के लिए की गई है।

प्रो. सोमनाथ सचदेवा, जो पहले से ही कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के वीसी हैं, अब एमडीयू की जिम्मेदारियां भी संभालेंगे। यह एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त जिम्मेदारी है जो यूनिवर्सिटी के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करेगी।

हाल ही में एमडीयू में हुई एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की मीटिंग ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। यह मीटिंग वीसी प्रो. राजबीर सिंह के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बुलाई गई थी। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य पदोन्नति और नई भर्तियों को अंतिम रूप देना था। इस प्रक्रिया के दौरान, वीसी प्रो. राजबीर सिंह ने रजिस्ट्रार को भी निलंबित कर दिया था, जो एक असामान्य कदम था।