Genomic Profiling Successfully Treats Cancer Woman Gets New Life By Targeting Brca1 Gene Mutation
DNA में हुए बदलाव का पता कर किया इलाज, कैंसर को हराया
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव में एक महिला ने ओवरी कैंसर को हराया। कीमोथेरेपी और सर्जरी के बाद भी जब कैंसर ठीक नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने जेनोमिक प्रोफाइलिंग की। जीन में बदलाव का पता चलने पर खास दवा दी गई। कुछ महीनों के इलाज के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हो गई। यह उपचार कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाता है।
गुड़गांव की एक 48 वर्षीय महिला को ओवरी कैंसर से लड़ने में जेनोमिक प्रोफाइलिंग से मिली बड़ी राहत। कीमोथेरेपी और सर्जरी के बाद भी जब कैंसर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने महिला के जीन में बदलाव की जांच की। BRCA1 जीन में गड़बड़ी मिलने पर उसे खास टार्गेटेड दवा दी गई, जिसने सीधे उस जीन को निशाना बनाया। कुछ महीनों के इलाज के बाद महिला अब पूरी तरह स्वस्थ है, जो कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाता है।
यह मामला शहर के एक निजी अस्पताल का है, जहां महिला पेट में सूजन और दर्द की शिकायत लेकर पहुंची थी। जांच में पता चला कि उन्हें ओवरी कैंसर है और यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल चुका है। शुरुआती इलाज के तौर पर कीमोथेरेपी और सर्जरी की गई, लेकिन बीमारी पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। ऐसे में, डॉक्टरों की टीम ने जेनोमिक प्रोफाइलिंग का सहारा लिया। इस आधुनिक तरीके से शरीर के जीन (DNA) स्तर पर बीमारी की जड़ को समझा जाता है।अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी निदेशक डॉ. अमित भार्गव ने बताया कि कई बार कैंसर के इलाज के विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में जीन स्तर पर की गई जांच बहुत मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने कहा, "मरीज की लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना कम थी, लेकिन प्रिसिजन मेडिसिन के जरिए आज वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।" यह केस कैंसर के इलाज में नई उम्मीदें और संभावनाएं खोलता है। हर मरीज में कैंसर का कारण अलग हो सकता है, और जीन स्तर की पहचान से इलाज को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है।
जेनोमिक प्रोफाइलिंग एक ऐसा आधुनिक उपचार तरीका है जो बीमारी को शरीर के जीन (DNA) स्तर पर समझने में मदद करता है। हमारे शरीर की हर कोशिका में जीन होते हैं जो तय करते हैं कि शरीर कैसे काम करेगा। जब इन जीनों में कोई बदलाव या गड़बड़ी होती है, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। जेनोमिक प्रोफाइलिंग में खास जांचों से यह पता लगाया जाता है कि किस जीन में बदलाव हुआ है और क्या वही बीमारी का कारण है। इसके बाद उसी के अनुसार दवा तय की जाती है। इसका मतलब है कि अब 'वन साइज फिट्स ऑल' यानी सबके लिए एक जैसा इलाज नहीं, बल्कि हर मरीज के लिए अलग और सटीक उपचार संभव है।
इस मामले में, जब कीमोथेरेपी की छह साइकिल और सर्जरी के बाद भी कैंसर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, तो डॉक्टरों की टीम ने जेनोमिक प्रोफाइलिंग की। इसके तहत महिला के जीन में हो रहे बदलावों की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में BRCA1 जीन में बदलाव का पता चला। इसी जानकारी के आधार पर मरीज को एक ऐसी खास दवा दी गई, जो सीधे इस जीन म्यूटेशन को निशाना बनाती है। कुछ महीनों के इलाज के बाद जब दोबारा जांच की गई, तो न तो ट्यूमर मिला और न ही कैंसर। अब महिला को पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। यह दिखाता है कि कैसे जीन स्तर की समझ से कैंसर जैसे जटिल रोगों का भी प्रभावी इलाज किया जा सकता है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है जिनके लिए पारंपरिक इलाज कारगर नहीं हो पा रहा था।