Grand Event By Maithili Sahitya Mahasabha On International Mother Language Day Evening Adorned With Poetry Honor And Discourse
कविता, सम्मान और विमर्श से सजा मातृभाषा दिवस
नवभारत टाइम्स•
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मैथिली साहित्य महासभा ने नई दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर कवि गोष्ठी, मैसाम सम्मान और विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। साहित्यकार डॉ. गंगेश गुंजन को मैसाम सम्मान से नवाजा गया। 'भोलालाल दास : व्यक्तित्व और कृतित्व' विषय पर संगोष्ठी हुई। 'अपूर्वा' पत्रिका और कई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
नई दिल्ली: मैथिली साहित्य महासभा ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर ITO स्थित मालवीय स्मृति सभागार में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन में मैथिली कविताओं का पाठ हुआ, एक चर्चित साहित्यकार को सम्मानित किया गया, और 'भोलालाल दास : व्यक्तित्व और कृतित्व' विषय पर एक विचार गोष्ठी भी हुई। साथ ही, मैसाम की पत्रिका 'अपूर्वा' और कई लेखकों की नई किताबों का भी लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम का पहला सत्र मैथिली कवि गोष्ठी के नाम रहा। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. आभा झा ने की, और प्रभाष अकिंचन मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। सुधा ठाकुर और अखिलेश मिश्र 'दाऊ जी' ने इस कवि सम्मेलन का संचालन किया। इस दौरान प्रमोद कुमार, परासर नारायण, बिनय ठाकुर, आभा झा, जयंती कुमारी, मुन्नी कामत, शुभम वत्स, प्रभा झा, अनीता मिश्र, शुभ्रा झा, कविता पाठक झा, मंजूषा झा, और सुप्रिया वात्स्यायन ने अपनी रचनाएं सुनाईं।दूसरे सत्र में मैथिली के जाने-माने साहित्यकार डॉ. गंगेश गुंजन को मैसाम सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान के लिए दिया गया।
तीसरे सत्र में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसका मुख्य विषय 'भोलालाल दास : व्यक्तित्व और कृतित्व' था। यह वार्षिक संगोष्ठी चंद्रशेखर पासवान की अध्यक्षता में हुई और अरुण कुमार मिश्र ने इसका संचालन किया। इस गोष्ठी में शंभुनाथ मिश्र, जीवेंदु प्रसाद कर्ण और प्रेम चौधरी ने अपने विचार रखे।
इस कार्यक्रम की एक और खास बात रही मैसाम की अर्धवार्षिक पत्रिका 'अपूर्वा' का लोकार्पण। यह पत्रिका संजीव सिन्हा और उज्जवल कुमार झा के संयुक्त संपादन में प्रकाशित हुई है। इसके अलावा, राज किशोर मिश्र, निवेदिता झा और प्रभाष अकिंचन की नई किताबों को भी इस मौके पर पाठकों के लिए जारी किया गया। यह आयोजन मैथिली भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।