Teachers To Launch Nationwide Campaign Against Tet Compulsion From March 9
TET की अनिवार्यता के खिलाफ 9 से अभियान चलाएंगे शिक्षक
नवभारत टाइम्स•
शिक्षक अब कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता का विरोध करेंगे। इसके खिलाफ नौ मार्च से प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन होगा। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले यह लड़ाई लड़ी जाएगी। शिक्षक इसे अपने अस्तित्व का प्रश्न बता रहे हैं। वे टीईटी के बगैर पात्र न मानने को गलत बता रहे हैं।
लखनऊ: शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता के खिलाफ सभी शिक्षक संगठन एकजुट हो गए हैं। उन्होंने इस लड़ाई को प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक लड़ने का फैसला किया है। इसके लिए ' अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ' नाम से एक नया मोर्चा बनाया गया है। 9 मार्च से शुरू होने वाले सभी आंदोलन इसी नए मोर्चे के बैनर तले चलाए जाएंगे। रविवार को लखनऊ में शिक्षक संगठनों की एक संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया।
अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व का सवाल बताया। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि TET के बिना शिक्षकों को पात्र न मानना बिल्कुल गलत है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी और यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने भी इस लड़ाई में आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।यह फैसला शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। कई शिक्षक संगठनों ने मिलकर इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने का फैसला किया है। उनका मानना है कि कार्यरत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता अनुचित है। इस नए मोर्चे का गठन इस लड़ाई को और मजबूत करेगा।
यह आंदोलन सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षक इसे सड़क से लेकर संसद तक ले जाने की तैयारी में हैं। इसका मतलब है कि वे अपनी मांगों को उठाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यह उनके भविष्य और उनके अस्तित्व का सवाल है। वे इसे हल्के में नहीं ले सकते।
TET (Teacher Eligibility Test) एक परीक्षा है जो शिक्षकों की योग्यता जांचने के लिए होती है। कुछ शिक्षक संगठनों का मानना है कि जो शिक्षक पहले से पढ़ा रहे हैं, उनके लिए यह परीक्षा दोबारा देना सही नहीं है। वे इस नियम का कड़ा विरोध कर रहे हैं।