Lord Krishna Sacrificed The Grandeur Of Three Worlds In Exchange For Sudamas Handful Of Rice Shrimad Bhagwat Katha
'सुदामा के दिए एक मुट्ठी चावल के बदले श्रीकृष्ण ने तीनों लोकों के वैभव को न्यौछावर कर दिया'
नवभारत टाइम्स•
हापुड़नगर के जवाहर गंज में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि सुदामा के एक मुट्ठी चावल के बदले श्रीकृष्ण ने तीनों लोकों का वैभव न्यौछावर कर दिया। कथा में श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह का वर्णन भी किया गया।
हापुड़ नगर के जवाहर गंज में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र , कथा के समापन और भगवान श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह के प्रसंग सुनाए गए। कथावाचक डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में ही भगवान श्रीकृष्ण हैं और कथा सुनना साक्षात श्रीकृष्ण के दर्शन करने जैसा है। उन्होंने सुदामा की कथा सुनाते हुए सिखाया कि व्यक्ति को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए, पर स्वाभिमान जरूर बनाए रखना चाहिए। यह भी बताया गया कि कैसे श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा द्वारा दिए गए एक मुट्ठी चावल के बदले तीनों लोकों का सुख और वैभव दे दिया। इस मौके पर आनंद गर्ग, विशाल अग्रवाल, मनोज कर्णवाल, विकास गोयल, डॉ. सुमन अग्रवाल, यर्थाथ अग्रवाल, भावना अग्रवाल, चंद्र प्रकाश ठठेरे, शांतनु सिंघल, राहुल सिंघल, संजीव रस्तोगी, आयुष बिट्टू वर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कथावाचक डॉ. शैल बिहारी दास ने इस बात पर जोर दिया कि श्रीमद्भागवत कथा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का ही रूप है। उन्होंने कहा, "श्रीमद्भागवत कथा में ही भगवान श्री कृष्णा हैं और श्रीकृष्ण ही श्रीमद्भागवत है।" इसलिए, कथा सुनने का मतलब है सीधे भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना। यह सुनकर भक्तों को बहुत आनंद आया।सुदामा की कहानी सुनाते हुए डॉ. शैल बिहारी दास ने जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया। उन्होंने कहा कि इंसान को कभी भी अपने ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए। लेकिन, अपने आत्म-सम्मान को कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख है जो हमें विनम्रता और आत्म-सम्मान दोनों सिखाती है।
उन्होंने आगे बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के दोस्त सुदामा के प्रति अपनी दोस्ती निभाई। सुदामा बहुत गरीब थे और उनके पास श्रीकृष्ण के लिए बस एक मुट्ठी चावल थे। श्रीकृष्ण ने इतने थोड़े से उपहार को स्वीकार किया और बदले में सुदामा को तीनों लोकों का धन और सुख दे दिया। यह दोस्ती की एक अद्भुत मिसाल है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया। डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण किसी भी रिश्ते को बहुत गंभीरता से निभाते हैं। उन्होंने कहा, "श्री कृष्ण भगवान ही है, जिससे किसी भी प्रकार का संबंध बनाया उसे स्वयं निभाते है।" इसका मतलब है कि अगर आप भगवान से कोई भी रिश्ता जोड़ते हैं, तो वह उसे पूरी तरह निभाते हैं। यह सुनकर भक्तों को भगवान के प्रति और भी आस्था हुई।