कॉलेजों को यौन उत्पीड़न रोकने के लिए अधिनियम का करना होगा पालन

नवभारत टाइम्स

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कॉलेजों को यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बने कानून का पालन करना होगा। विश्वविद्यालय ने सभी प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। कॉलेजों को अपनी नीतियां बनानी होंगी और उन्हें प्रचारित करना होगा। यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए आंतरिक शिकायत समितियों का गठन भी करना होगा।

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने अपने से जुड़े सभी कॉलेजों को महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। यह कदम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नवंबर 2025 के निर्देशों के अनुसार उठाया गया है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं और महिला कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाना है। कॉलेजों को अब अपनी नीतियां बनानी होंगी और उन्हें वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और हैंडबुक के माध्यम से प्रचारित करना होगा। साथ ही, यौन उत्पीड़न की शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए प्रशिक्षित सदस्यों वाली आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना अनिवार्य होगा।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि UGC ने सभी शैक्षणिक परिसरों में छात्राओं और महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील माहौल तैयार करने के लिए यह निर्देश जारी किए थे। अब कॉलेजों को इस अधिनियम के तहत अपनी नीतियां बनानी होंगी। इन नीतियों को कॉलेज की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और हैंडबुक पर प्रकाशित करना होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी छात्र-छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों के बारे में जान सकें।
इसके अलावा, कॉलेजों को यौन उत्पीड़न की शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति ( Internal Complaints Committee ) या आंतरिक समिति का गठन करना होगा। इस समिति में ऐसे सदस्य होने चाहिए जिन्हें इस विषय में प्रशिक्षण मिला हो। यह कदम यौन उत्पीड़न के मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।