Greater Noida Fear Of Contaminated Water In Delta 1 Rwa Demands Re investigation
अथॉरिटी पहुंची डेल्टा-1 की RWA दूषित पानी की दोबारा जांच की मांग
नवभारत टाइम्स•
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर पानी के सैंपल की दोबारा जांच की मांग की है। सेक्टरवासियों में भय का माहौल है और वे नल के पानी का उपयोग करने से कतरा रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में दूषित पानी की समस्या को लेकर आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने शुक्रवार को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर सेक्टर में सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल की दोबारा जांच कराने की मांग की। आरडब्ल्यूए का कहना है कि दूषित पानी की आशंका से लोगों में डर का माहौल है और वे नल के पानी का इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं।
सेक्टर डेल्टा-1 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष प्रमोद भाटी ने बताया कि कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग ने पानी के सैंपल लिए थे, लेकिन इसके बाद भी सेक्टर में खराब पानी की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर पानी की दोबारा और अच्छे से जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और लोगों का डर भी कम होगा। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच के लिए सेक्टर के अलग-अलग ब्लॉकों से नए सैंपल लिए जाने चाहिए। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता समय पर चल सकेगा।फिलहाल, डर के मारे कई परिवार सप्लाई के पानी को पीने लायक नहीं मान रहे हैं। वे बोतलबंद पानी या किसी और तरीके से पानी का इंतजाम कर रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि साफ पानी हर नागरिक का हक है। अगर समय रहते पानी की क्वालिटी की दोबारा जांच करके रिपोर्ट सबको बता दी जाए, तो सेक्टर के लोगों को राहत मिलेगी और पानी को लेकर जो डर फैला है, वह खत्म हो जाएगा।
आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य अधिकारियों से मिलकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि सेक्टर डेल्टा-1 में सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में काफी घबराहट है। यह घबराहट इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है कि पानी पीने लायक नहीं है। इस वजह से लोग नल से आने वाले पानी का इस्तेमाल करने से डर रहे हैं।
प्रमोद भाटी ने बताया कि पहले भी पानी के सैंपल लिए गए थे, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। इसलिए, वे चाहते हैं कि एक बार फिर से पानी की जांच हो। इस बार जांच ऐसी हो कि सब कुछ साफ-साफ पता चल जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के लिए सैंपल सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों से लिए जाएं। ऐसा करने से यह पक्का हो जाएगा कि कहीं कोई समस्या तो नहीं है।
लोगों की हालत यह है कि वे सप्लाई के पानी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वे या तो बाहर से पानी खरीद रहे हैं या फिर किसी और जुगाड़ से पानी का इंतजाम कर रहे हैं। आरडब्ल्यूए का कहना है कि यह ठीक नहीं है। हर किसी को साफ पानी मिलना चाहिए। अगर सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और पानी की जांच करवाकर रिपोर्ट सार्वजनिक करें, तो लोगों का डर दूर होगा और उन्हें पीने के साफ पानी की चिंता नहीं रहेगी।