Traffic Policemen Falling Victim To Deafness Unheard Voices Hidden In Noise
कोई तो सुने, ट्रैफिक के ‘शोर’ में छिपी ‘चुप्पी’
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव के ट्रैफिक पुलिसकर्मी ट्रैफिक के शोर में अपनी सुनने की क्षमता खो रहे हैं। एक सर्वे में पाया गया कि 15 फीसदी से ज्यादा जवान इस समस्या से जूझ रहे हैं। हॉर्न, इंजन और जाम का शोर उनके कानों पर भारी पड़ रहा है। यह स्थिति चिंताजनक है और इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
गुड़गांव में ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगातार बढ़ते शोर के कारण अपनी सुनने की क्षमता खो रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ ओटोलरैंगोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (AOI) द्वारा किए गए एक सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ल्ड हियरिंग डे के मौके पर सामने आए इस सर्वे के अनुसार, शहर के करीब 15 फीसदी से ज्यादा युवा ट्रैफिक पुलिसकर्मी धीरे-धीरे बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि इसका मुख्य कारण शहर का लगातार बढ़ता शोर है, जो हॉर्न, इंजन और जाम के शोर से उत्पन्न होता है।
यह सर्वे गुड़गांव के 180 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर किया गया था। इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना था कि दिनभर शोरगुल में रहने से उनके कानों पर क्या असर पड़ रहा है। AOI गुड़गांव से जुड़ीं सीनियर ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. सारिका वर्मा ने बताया कि यह सर्वे बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी धूप, धूल और धुएं के बीच घंटों खड़े रहकर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालते हैं। लेकिन, इस काम के दौरान वे एक और बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं, जिस पर शायद किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।डॉ. सारिका वर्मा ने बताया कि सर्वे के नतीजे चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा, "करीब 15 फीसदी से ज्यादा जवान अपनी सुनने की क्षमता खोते जा रहे हैं।" डॉक्टरों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण शहर का लगातार बढ़ता शोर है। ट्रैफिक के बीच खड़े ये जवान शहर को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। लेकिन, लगातार हॉर्न, इंजन और जाम के शोर के बीच ड्यूटी करने से उनके कानों पर बुरा असर पड़ रहा है। वे धीरे-धीरे बहरेपन की ओर बढ़ रहे हैं।
यह सर्वे इस बात पर प्रकाश डालता है कि हमारे शहर के रक्षक, जो हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, खुद एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की यह चुप्पी ट्रैफिक के शोर में कहीं दब जाती है। वर्ल्ड हियरिंग डे जैसे मौके पर ऐसे सर्वे हमें इस समस्या के प्रति जागरूक करते हैं और इन वीर जवानों की सेहत का ध्यान रखने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।