कमिटी ने सौंपी रिपोर्ट, फिर भी डॉक्टरों की तैनाती पर संशय

नवभारत टाइम्स

उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है। जनवरी में हुए इंटरव्यू के नतीजे अभी तक जारी नहीं हुए हैं। एक शिकायत पर बनी कमिटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, कमिटी ने नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का सुझाव दिया है। महानिदेशक ने जल्द भर्ती पूरी करने का दावा किया है।

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी को पूरा करने के लिए जनवरी में हुए वॉक-इन इंटरव्यू के नतीजे अभी तक जारी नहीं हुए हैं। रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके एक अभ्यर्थी की शिकायत के बाद बनी कमेटी ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, कमेटी ने शिकायत को बेबुनियाद बताते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की सलाह दी है। महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने भी कमेटी की सिफारिशों के अनुसार जल्द ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिलाया है।

स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल 18 नवंबर से 26 नवंबर तक 601 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 1790 एमबीबीएस डॉक्टरों के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इन पदों के लिए 19 से 21 जनवरी तक इंटरव्यू आयोजित किए गए थे, जिनके नतीजे 30 जनवरी को आने थे। इसी बीच, रूस से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर चुके एक डॉक्टर ने दूसरे देशों से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया था।
इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि शिकायत निराधार थी और भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया कि नियुक्ति प्रक्रिया को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जाए।

महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने कहा है कि कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए जल्द ही डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।