कितना स्वच्छ है अपना लखनऊ

नवभारत टाइम्स

इंदौर शहर में दूषित पानी से हुई मौतों ने लखनऊ को चेतावनी दी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में लखनऊ को तीसरा स्थान मिला, लेकिन हकीकत अलग है। कूड़े के ढेर स्वच्छता पर सवाल उठा रहे हैं। नागरिकों को जीवन जीने की सुगमता का अधिकार मिलना चाहिए। लखनऊ के नागरिक इस अधिकार से वंचित हैं। भविष्य में गंभीर खतरे की आशंका है।

questions on lucknows cleanliness celebration of third place but piles of garbage expose reality
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने लखनऊ के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। हाल ही में स्वच्छता सर्वेक्षण में लखनऊ को तीसरा स्थान मिला था, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। शहर में हर तरफ कूड़े के ढेर लगे हैं, जो स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहे हैं। सीए पवन धवन ने कहा कि नागरिकों का 'Ease of living' (आराम से जीने का अधिकार) छीना जा रहा है।

इंदौर शहर में गंदे पानी की सप्लाई के कारण हुई मौतों की घटना लखनऊ के लिए एक चेतावनी है। यह घटना भविष्य में ऐसी ही भयानक दुर्घटनाओं की आशंकाओं को बढ़ाती है। कुछ महीने पहले, लखनऊ को स्वच्छता अभियान के सर्वेक्षण में तीसरा स्थान मिलने पर खूब जश्न मनाया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
पूरे शहर में हर जगह कूड़े और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ये ढेर शहर की स्वच्छता की पोल खोल रहे हैं। नागरिकों का 'Ease of living' (आराम से जीने का अधिकार) उनका पहला अधिकार है। लेकिन लखनऊ के नागरिक इस अधिकार से वंचित हैं। यह बात सीए पवन धवन ने कही है।

यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि स्वच्छ वातावरण हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जब शहर में कूड़े के ढेर लगे हों और पानी की सप्लाई भी दूषित हो, तो नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है। इंदौर की घटना हमें सिखाती है कि स्वच्छता को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे शहर में भी ऐसी घटनाएं न हों। इसके लिए प्रशासन को सक्रिय रूप से काम करना होगा। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना होगा। तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित लखनऊ का निर्माण कर पाएंगे।