चावल फटक दो

Contributed byदिलीप लाल|नवभारत टाइम्स

अनाज साफ करने की प्रक्रिया को फटकना कहते हैं। यह शब्द रसोई से लेकर खलिहान तक प्रचलित है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसके कई रूप हैं जैसे झनकना, छनकना, पछोरना और ओसाना। यह प्रक्रिया अनाज से गंदगी और भूसा हटाने के काम आती है। फटकने की ध्वनि से भी कुछ शब्द बने हैं।

rice sifting from kitchen to barn the journey of words and the play of sound
रसोई से लेकर खलिहान तक, 'फटकना' शब्द का इस्तेमाल अनाज से गंदगी, कंकड़ और भूसा हटाने के लिए होता है। भारत के कई हिस्सों में इसी काम को 'झनकना' या 'छनकना' भी कहते हैं। माना जाता है कि अनाज फटकते समय चूड़ियों की 'झन-झन' आवाज़ से ही 'छनकना' शब्द बना होगा। संस्कृति में अनाज फटकने की क्रिया को ‘शूर्पेण उत्क्षेपणम्’ कहा जाता है। बांग्ला में इसे 'आमि गोम पाछड़ाबो' (मैं गेहूं फटकूंगी) कहते हैं। कुमाऊं के पिथौरागढ़ की सोर्याली बोली में इसे 'फट्याला लगाना' कहते हैं, जिसमें सूप या कपड़े से हवा देकर अनाज साफ किया जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में यह 'पछोरना' बन जाता है। खलिहानों में किसान धान या गेहूं को हवा से साफ करते हैं, जिसे 'ओसाना' कहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंडराने या भटकने को भी 'फटकना' कहते हैं, जैसे 'मेरी गली में दोबारा मत फटकना'।

'फटकना' एक ऐसा शब्द है जो हमारे घरों की रसोई से लेकर खेतों के खलिहानों तक हर जगह इस्तेमाल होता है। जब हम सूप या थाली में रखे अनाज से कंकड़, भूसा या कोई भी गंदगी निकालते हैं, तो हम कहते हैं कि इसे 'फटक कर साफ कर दो'। यह काम भारत के कई अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
कुछ जगहों पर इसी प्रक्रिया को 'झनकना' या 'छनकना' भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह शब्द अनाज फटकते समय चूड़ियों से निकलने वाली 'झन-झन' की आवाज़ से बना है। हमारी संस्कृति में, सूप से अनाज फटकने की क्रिया को संस्कृत में ‘शूर्पेण उत्क्षेपणम्’ कहा जाता है।

यह शब्द सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। बांग्ला भाषा में, जब कोई कहता है 'आमि गोम पाछड़ाबो', तो इसका मतलब होता है 'मैं गेहूं फटकूंगी'। कुमाऊं के कुछ हिस्सों, खासकर पिथौरागढ़ की सोर्याली बोली में, इस काम को 'फट्याला लगाना' कहते हैं। इसमें सूप या कपड़े की मदद से हवा दी जाती है ताकि अनाज साफ हो सके।

उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में, इसी काम को 'पछोरना' कहा जाता है। खलिहानों में जब किसान धान या गेहूं को हवा की मदद से साफ करते हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया को 'ओसाना' कहते हैं। यह एक बहुत ही आम तरीका है जिससे किसान अपने अनाज को शुद्ध करते हैं।

एक और मजेदार बात यह है कि 'फटकना' शब्द का इस्तेमाल किसी के आसपास मंडराने या भटकने के लिए भी किया जाता है। जैसे, कोई किसी को चेतावनी देते हुए कह सकता है, "दोबारा मेरी गली में मत फटकना।" यह दिखाता है कि कैसे एक ही शब्द के कई मतलब हो सकते हैं।