आखिर फंड हाउस क्यों रोक रहे हैं गोल्ड ETF में नया निवेश?

Contributed byमुंबई,Sudha.Shrimali|नवभारतटाइम्स.कॉम

कई म्यूचुअल फंड हाउस ने गोल्ड ईटीएफ में नया निवेश रोकना शुरू कर दिया है। टाटा म्यूचुअल फंड ने अपने गोल्ड ईटीएफ और एफओएफ में सब्सक्रिप्शन पर रोक लगा दी है। अन्य फंड हाउस भी ऐसे ही कदम उठा रहे हैं।

आखिर फंड हाउस क्यों रोक रहे हैं गोल्ड ETF में नया निवेश?

मुंबई: मंगलवार को टाटा म्यूचुअल फंड ने अपने गोल्ड ETF और FoF में सब्सक्रिप्शन पर अस्थाई रोक की घोषणा की है। Tata Gold ETF में, टाटा म्यूचुअल फंड के साथ सीधे निवेश करने वाले बड़े निवेशकों के सब्सक्रिप्शन ट्रांजैक्शन-खासकर कम से कम 25 करोड़ रुपये के निवेश वाले ट्रांजैक्शन, को लागू होने की तारीख से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इससे पहले कई म्यूचुअल फंड हाउस ने गोल्ड-लिंक्ड स्कीम में नए निवेश (इनफ्लो) पर सीमा और सीधे फंड लेवल पर बहुत बड़े इंस्टीट्यूशनल सब्सक्रिप्शन पर रोक जैसे उपाय लागू किए हैं। अपने गोल्ड ETF और गोल्ड ETF FoF में सब्सक्रिप्शन पर रोक लगाने वाली दूसरी फंड हाउस कंपनियों में आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और एक्सिस म्यूचुअल फंड का नाम है।


आखिर फंड हाउस क्यों रोक रहे हैं गोल्ड ETF में नया निवेश?

जानकारों का कहना है कि गोल्ड ETF असल सोने (फिजिकल गोल्ड) से जुड़े होते हैं। जब भी इन स्कीम में नया पैसा आता है, तो फंड हाउस को नए ETF यूनिट बनाने के लिए और सोना खरीदना पड़ता है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के जॉइंट CEO फिरोज अजीज के अनुसार, भारत आयातित सोने पर निर्भर है और FY26 में देश का सोना आयात बिल 72 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। सरकार की कोशिश है कि इंपोर्ट कम करना पड़े, इसलिए फंड हाउस यह घोषणाएं कर रहे हैं। फंड हाउस की इन पाबंदियों का असर मुख्य रूप से बड़े निवेशकों के लिए हैं।

Gold ETF में निकासी: WGC

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 5 जून को समाप्त सप्ताह में गोल्ड ETF में ग्लोबली कुल नेट निवेश 17% घटकर 15.28 अरब डॉलर रह गया, जो 23 मई को समाप्त सप्ताह में 18.46 अरब डॉलर था। पिछले सप्ताह कुल 1.05 अरब डॉलर का निवेश आया, जबकि 2.71 अरब डॉलर की निकासी हुई। इस साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक निकासी है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ट्रेंड मुख्य रूप से इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और सॉवरेन फंड्स की वजह से दिख रहा है, जबकि रिटेल निवेशक पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के हिस्से के तौर पर गोल्ड में अपना निवेश बनाए हुए हैं।

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